आत्महत्या को उकसाने के दोषी पति, सास, ससुर को 10 वर्ष का कारावास

फिरोजाबाद, 17 फ़रवरी (हि.स.)।न्यायालय ने सोमवार को विवाहिता को आत्महत्या के लिए उकसाने के दोषी पति, सास व ससुर को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। उन पर अर्थ दंड लगाया है। कोर्ट ने आदेश में महादेवी वर्मा की कविता का जिक्र करते हुए दोषियों को सजा सुनाई है।

थाना लाइनपार क्षेत्र के प्रदीप नगर निवासी सीता की 23 अप्रैल 2024 को जहर खाने से मौत हो गई थी। मृतका के मायका पक्ष के करन सिंह ने मृतका के पति सूर्यकांत, ससुर पोप सिंह, सास मिथलेश उर्फ मिस्सा, ननद नीतू व ननदोई अजय के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा यह कहते हुए दर्ज कराया कि सीता की शादी 10 दिसंबर 2013 को हुई थी। उसने दो बच्चों को जन्म दिया। शादी के बाद पता चला पति सूर्यकांत के किसी लड़की से अवैध संबंध है। जिसका सीता ने विरोध तो ससुरालियों ने उसके साथ मारपीट की तथा कहा कि अगर इतनी नाक वाली है तो जहर खाकर क्यों नहीं मर जाती। ससुरालीजन आए दिन ताना देते थे। कई बार पंचायत भी हुई लेकिन ससुरालियों में कोई बदलाव नहीं हुआ।पुलिस ने विवेचना के बाद पति सूर्यकांत, ससुर पोप सिंह व सास मिथलेश उर्फ मिस्सा के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या दो सर्वेश कुमार पाण्डेय की अदालत में चला। अभियोजन पक्ष की पैरवी एडीजीसी अवधेश शर्मा ने की। मुकदमे में गवाहों की गवाही तथा साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने पति सूर्यकांत, ससुर पोप सिंह व सास मिथलेश उर्फ मिस्सा को दोषी माना।न्यायालय ने सजा सुनाते हुए अपने आदेश में महादेवी वर्मा के शब्दों में-” सुधि मेरे आगन की जग में सुख की सिहरन हो अन्त खिली ! विस्तृत नभ का कोई कोना, मेरा न कभी अपना होना, परिचय इतना, इतिहास यही-उमड़ी कल थी, मिट आज चली।का जिक्र करते हुए लिखा है कि अभियुक्तगण न तो उस आंगन को सहेज पाये और न ही मृतका के जीवन को और इसका परिणाम यह हुआ कि सीता ने 28 वर्ष की उम्र में अपने जीवन को समाप्त कर दिया। ऐसी परिस्थिति में न्यायालय के विचार से अभियुक्तगण के संदर्भ में, सजा की मात्रा में कोई मृदुता की जाये, न्यायसंगत नहीं है।न्यायालय ने पति सूर्यकान्त, ससुर पोप सिंह एवं सास मिथलेश उर्फ मिस्सा को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा और एक-एक लाख रूपये के जुर्माने से दण्डित किया है। जुर्माना न दिये जाने की दशा में एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।

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