कालागढ़ में वन और सिंचाई भूमि से सैकड़ों परिवारों को हटाने के मामले में हुई सुनवाई

नैनीताल, 11 फ़रवरी (हि.स.)। हाई कोर्ट में कालागढ़ डैम के समीप वन विभाग व सिंचाई विभाग की भूमि पर अवैध रूप से रह रहे करीब 4 से 5 सौ परिवारों को हटाए जाने के मामले पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार व याचिकाकर्ता संस्था से कहा है कि जिला अधिकारी के आदेश के बाद जो लोग इसकी जद में आ रहे हैं उनकी लिस्ट बनाकर 17 फरवरी तक कोर्ट में पेश करें। सुनवाई पर जिला अधिकारी आशीष चौहान कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए।

जिला अधिकारी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्होंने 213 लोगों के विस्थापन के लिए सर्वे कर लिया है। बाकि लोगों को हटाने का नोटिस दिया गया है। अब नोटिस से प्रभावित लोग हाई कोर्ट की शरण मे आए हैं। इस पर कोर्ट ने प्रभावित लोगों की सूची कोर्ट में सरकार व समिति से पेश करने को कहा है।

मुख्य न्यायधीश जी नरेंद्र व न्यामूर्ति आशीष नैथानी की खण्डपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार कालागढ़ जन कल्याण उत्थान समिति ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने 1960 में कालागढ़ डैम बनाये जाने के लिए वन विभाग की कई हजार हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करके सिंचाई विभाग को दी थी। साथ में यह भी कहा था कि जो भूमि डैम बनाने के बाद बचेगी उसे वन विभाग को वापस किया जाएगा। डैम बनने के बाद कई हेक्टेयर भूमि वापस की गई लेकिन शेष बची भूमि पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों व अन्य लोगों ने कब्जा कर दिया। जनहित याचिका में कहा कि जिला अधिकारी का यह नोटिस पक्षपातपूर्ण है क्योंकि राज्य सरकार 213 लोगों को विस्थापित कर रही है, लेकिन वो भी दशकों से उसी स्थान पर रह रहे हैं उनको विस्थापित नहीं किया जा रहा। लिहाजा उनको भी अन्य की तरह विस्थापित किया जाए। जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार व याचिकाकर्ता संस्था से सभी प्रभावित लोगों की लिस्ट बनाकर कोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा है।

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