यह आयोजन दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र, देहरादून के सहयोग से ऐतिहासिक शहरी परिदृश्य श्रृंखला 2025 के तहत किया गया, जिसका उद्देश्य द्रोणा फाउंडेशन, आईसीओएमओएस इंडिया, राष्ट्रीय शहरी मामले संस्थान (एनआईयूए), हेरिटोपोलिस और अल्ट्रिम पब्लिशर्स के साथ विरासत और शहरी परिदृश्य के बारे में जागरूकता बढ़ाना रहा। यह पहल रचनात्मकता, कल्पना और विचारों को जीवंतता के साथ उठाती है जो ऐतिहासिक शहर देहरादून के संरक्षण में बहु-विषयक दृष्टिकोण को रेखांकित करते हैं। शहर की योजना के अभिन्न अंग के रूप में एक परिदृश्य दृष्टिकोण को शामिल करने पर चर्चा का सुझाव दिया गया था।

डब्ल्यूआईआई, सी 2 सी केंद्र अनुरंजन रॉय ने अन्य शहरों के उदाहरण देते हुए कहा कि जहा परिदृश्य दृष्टिकोण शहर की योजना का अभिन्न अंग रहा है। विश्व वन्यजीव कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के विशेषज्ञों ने वन्यजीव मार्ग की अवधारणा और शहरी शहर की योजना में उनके एकीकरण पर बात रखी। उन्होंने कहा कि जो हरित आवरण को बहाल करने और पर्यावरणीय प्रभाव को रोकने में मदद कर सकता है।

हिमालयन वाडिया भूविज्ञान के भूविज्ञानी ने शहर में कई भू-विरासत स्थलों पर प्रकाश डाला। आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर राम सतीश ने चर्चा की कि विरासत शहर के सतत विकास के लिए एक प्रेरक दिशा हो सकती है और इसका सार्थक प्रभाव हो सकता है। एक ‘विरासत सलाहकार समिति’ का विचार सामने आया, जिससे एक अधिनियम और उसके कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

उत्तराखंड की चैप्टर प्रभारी और सह-संयोजक अंजलि भरतरी ने कहा कि इंटैक ने डीआईटी विश्वविद्यालय के साथ विरासत स्थलों की सूची बनाना शुरू कर दिया है, जो विरासत स्थलों को उनका दर्जा दिलाने और उन्हें केवल पर्यटन उत्पाद न मानने के लिए एक पूर्वापेक्षा है। इससे शहर की पहचान बढ़ाने, शहर के प्रति पर्यटकों की धारणा को सक्रिय करने और अधिक से अधिक लोगों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

देहरादून की संयोजक भारती पी जैन ने दून शहर की बहुत सराहना की। कार्यक्रम में 25 से अधिक,संस्थाओं के प्रतिनिधियों व अन्य प्रबुद्ध जनों ने प्रतिभाग किया।

By editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights