हरिद्वार डिवीजन में हाथियों की मौत के मामलों को देखें तो पहली मौत 26 सितंबर को खानपुर रेंज से सामने आई थी। यहां अमरूद के बगीचे में एक नर हाथी का शव मिला था। इस हाथी की उम्र 30 से 35 साल बताई जा रही है। हालांकि, वन विभाग इसकी मौत के पीछे की वजह नहीं बता पाया है। हाथी के पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट भी अभी तक प्राप्त नहीं हो पाई है। हालांकि, स्थानीय लोग करंट लगने से मौत की बात कह रहे हैं।

हरिद्वार डिवीजन में ही खानपुर रेंज में 29 सितंबर को एक और हाथी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। हाथी का यह शव बुग्गावाला गांव के पास मिला, जो कि एक निजी भूखंड पर था। यह हाथी काफी दिनों से हरिद्वार शहरी और रिहायशी इलाकों में देखा जा रहा था। खास बात यह है कि इस हाथी की मौत करंट लगने से पाई गई है। जिस पर भू स्वामी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजने की तैयारी की जा रही है। यह हाथी करीब 42 साल का बताया जा रहा है।

अभी दूसरे हाथी की मौत के बाद वन विभाग में हड़कंप की स्थिति थी कि 1 अक्टूबर को एक और हाथी का शव मिल गया। हैरानी की बात यह है कि यह मामला भी हरिद्वार डिवीजन का ही है और हरिद्वार डिवीजन के श्यामपुर रेंज की ये घटना है।

फिलहाल इस नर हाथी के बेहद कमजोर होने और हार्ट फेल के कारण मृत्यु होने की बात कही जा रही। इस नर हाथी की उम्र करीब 30 साल मानी जा रही है। एक के बाद एक हाथियों के मरने से भी यहां के अधिकारी कर्मचारियों की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

By editor

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