अपने प्रवास के दौरान डॉ. पंड्या ने जर्मनी के ऐतिहासिक फ्रैंकफर्ट पार्लियामेंट में आयोजित पीस एंड लीडरशिप कॉन्क्लेव में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह वही संसद है जिसकी स्थापना 16वीं शताब्दी में हुई थी। इस ऐतिहासिक स्थल पर पहली बार गायत्री महामंत्र की दिव्य ध्वनि गूंजी। एक ऐसा क्षण जिसने न केवल भारतीय संस्कृति का सम्मान बढ़ाया, बल्कि वहां उपस्थित सभी प्रतिभागियों के मन को भी गहराई से छुआ।

इस अवसर पर डॉ. पण्ड्या ने भारतीय संस्कृति के मूल तत्व-यज्ञ, तप, सेवा और सद्भाव को विश्व शांति और नेतृत्व के लिए समाधान के रूप में प्रस्तुत किया। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि वर्तमान समय में जब विश्व युद्ध, जलवायु संकट, मानसिक तनाव और सामाजिक विघटन जैसी अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे में भारत का शाश्वत दृष्टिकोण ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ पूरा विश्व एक परिवार है-एक व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय से एक ऐसे नवयुग की नींव रखी, जो आत्मविकास, नैतिक उत्थान और वैश्विक शांति पर आधारित है।

अखिल विश्व गायत्री परिवार के वरिष्ठ प्रतिनिधि डॉ. पण्ड्या ने कहा कि वर्ष 2026 में माता भगवती देवी शर्मा एवं दिव्य अखंड दीप के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में वैश्विक एकता, आत्म परिवर्तन एवं आध्यात्मिक नवजागरण को समर्पित भव्य अंतरराष्ट्रीय आयोजन किए जाएंगे।

इस दौरान श्रीमती शुचिता किशोर कौंसुल जनरल ऑफ इंडिया फ्रैंकफर्ट, सुश्री उर्सुला बुश चेयरवुमन पार्लियामेंटरी बोर्ड एसपीडी सिटी ऑफ फ्रैंकफर्ट, प्रो. अजीत सिकंद जोहान गुटेनबर्ग यूनिवर्सिटी, सुश्री कृति कुमार काउंसलर सिटी केल्स्टरबाक, राहुल कुमार सांसद, जॉय एडविन थनाराजा सहित विश्व के अनेक राजनयिक, राजनीतिज्ञ, शिक्षाविद् एवं सामाजिक नेतृत्वकर्ता उपस्थित रहे।

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