इस अवसर पर ग्राम्य विकास विभाग, हरिद्वार द्वारा लगाए गए स्टॉल के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री की गई। इस स्टॉल को लोगों का भरपूर समर्थन मिला और ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों ने खूब सराहना बटोरी।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं ने अपने हुनर से तैयार किए गए स्थानीय व हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया। इनमें मसाले, अचार, पापड़, हस्तशिल्प, जूट बैग, मिट्टी के बर्तन, गुड और आटे से बने नैचुरल उत्पाद तथा अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएँ प्रमुख रूप से शामिल थीं।

तीन दिनों में कुल 20,935 की बिक्री हुई, जो स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास और रुचि को दर्शाता है। ग्राम्य विकास विभाग, हरिद्वार के अधिकारियों ने बताया कि ऐसे अवसरों से ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मिलता है और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है। उन्होंने कहा कि विभाग भविष्य में भी इस तरह के मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से महिलाओं को प्रोत्साहन देने के प्रयास जारी रखेगा।

राज्य स्थापना रजत जयंती सप्ताह में लगाया गया यह स्टॉल ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादों की पहचान को नया आयाम देने वाला साबित हुआ।

By editor

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