शिविर का शुभारंभ करते हुए महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव व अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने कहा कि ध्यान साधना व कुण्डलिनी जागरण से रोग, शोक मुक्त भारत की कल्पना साकार होगी। उन्होंने कहा कि करौली शंकर महादेव योग, मंत्र दीक्षा, ध्यान साधना के माध्यम से राष्ट्र को रोग, शोक, भ्रम, भय, नशा व ऋण से मुक्ति दिलाने हेतु जो अभियान चला रहे हैं वह अत्यन्त सराहनीय है। आगामी वर्ष में हरिद्वार में होने वाले अर्द्धकुम्भ महापर्व के अवसर पर करौली शंकर महादेव के नेतृत्व में उनकी संस्था धार्मिक व सामाजिक आयोजन व सेवा प्रकल्पों को प्रारम्भ कर अर्द्धकुम्भ को दिव्य व भव्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी।

श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज ने कहा कि तंत्र पाखण्ड व फरेब नहीं अपितु उच्चतम व्यवस्था का मार्ग है, जिसे मुगल व अंग्रेजों के शासनकाल में आडम्बर के रूप में प्रचारित कर दिया गया। तंत्र के माध्यम से हम अपने तन, मन की व्यवस्था को सुचारू कर सार्थक दिशा की ओर अग्रसर होते हैं। उन्हांने कहा कि निश्चित रूप से इस प्रकार के आयोजन से देशभर के साधकों को नयी ऊर्जा व अवसर प्राप्त होंगे।

श्री करौली शंकर महादेव धाम व मिश्री मठ के परमाध्यक्ष करौली शंकर महादेव ने कहा कि मानवता की सेवा, युवा पीढ़ी में संस्कारों का समावेश ध्यान साधना व मंत्र दीक्षा के माध्यम से राष्ट्र को सशक्त बनाना व युवा पीढ़ी को सार्थक दिशा प्रदान करना इस संस्था का प्रमुख उद्देश्य है। करौली शंकर महादेव ने कहा कि भटके हुए मनुष्य को सद्मार्ग की ओर प्रेरित करना, नशा मुक्त राष्ट्र का निर्माण कर देश को विश्वगुरू के रूप में स्थापित करना ही संस्था का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही निश्चित रूप से आगामी वर्ष में हरिद्वार में दिव्य व भव्य अर्द्धकुम्भ मेला आयोजित होगा। संस्था भी अर्द्धकुम्भ के पावन अवसर पर सेवा प्रकल्पों का आयोजन करेगी।

इस अवसर पर देशभर से आये हजारों साधकों ने ध्यान साधना शिविर में प्रतिभाग किया। संस्था के डॉ. उमेश सचान, अनिरूद्ध शर्मा, सतपाल सिंह आदि परिजनों ने आये हुए संतों व गणमान्यजनों का स्वागत व अभिनन्दन किया।

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