देर रात तक चले इस कार्यक्रम में लोग जमकर झूमे। इससे पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देर शाम कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। अनेक कार्यक्रमों के बाद नरेन्द्र सिंह नेगी ने स्वर लहरी बिखेरी। उनकी मधुर आवाज ने श्रोताओं के दिलों को छू लिया तथा लोकधुनों की मिठास बिखरी तो श्रोताओं में जोश एवं उत्साह से सभी दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
नेगी ने अपने लोकगीत त्रियुगी नारायण, ठंडो रे ठंडो मेरे पहाड़ों का पाणी ठंडो, पर दर्शक स्वयं को झूमने से न रोक पाए और जमकर थिरके। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया। हर सुर के साथ जैसे पर्वतीय संस्कृति की आत्मा सजीव हो उठी। कार्यक्रम स्थल पर देर रात्रि तक गीतों की गूंज और उमंग से सराबोर रहा।
