इस अवसर पर सुतिक्षण मुनि महाराज ने सभी महिलाओं को पारंपरिक भोज दर खिलाया और उन्हें उपहार स्वरूप भेंट देकर आशीर्वाद दिया। रातभर आश्रम परिसर में तीज के पारंपरिक गीतों की गूंज रही। महिलाएं, पुरुष और बच्चे देर रात तक गीतों पर नृत्य करते रहे साथ ही नेपाली व्यंजनों का आनंद उठाकर सभी ने पर्व का उल्लास साझा किया।

इस अवसर पर स्वामी सुतिक्षण मुनि महाराज ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को एकजुट करने और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का कार्य करते हैं। पद्म प्रसाद सुबेदी ने बताया कि हरतालिका तीज के दिन महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की विधिवत पूजा करती हैं। पूजन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और घर में सुख समृद्धि आती है।

समाजसेवी सपना खड़का ने बताया कि मान्यता है कि आज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना से अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है। वहीं, माता पार्वती को सोलह श्रृंगार अर्पित करने से देवी प्रसन्न होती हैं और साधक के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। यही कारण है कि गोरखा समाज प्रति वर्ष धूमधाम से इस त्यौहार को मनाता है।

इस अवसर पर लोकनाथ सुबेदी, रवि देव शास्त्री, महंत दिनेश दास, शारदा सुबेदी, कमल खड़का, तनुजा पांडेय और रेखा शर्मा आदि उपस्थित रहे।

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