गुरुकुल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

हरिद्वार, 14 फरवरी (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के वनस्पति एवं सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग में चल रही दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आज समापन हुआ। समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बीएचईएल, हरिद्वार चिकित्सालय की डाॅ. यूएस शिल्पी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य की दृष्टि से हमें दैनिक जीवन में स्वच्छता व नियमित व्यायाम पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

इस अवसर पर समविश्वविद्यालय आईक्यूएसी सेल के निदेशक प्रो. नवनीत ने देश भर से आए प्रतिभागियों को आयुर्वेदिक औषधियों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि आयुर्वेद का शाब्दिक अर्थ जीवन का विज्ञान है। इस पद्धति से हमें रोगों से मुक्ति ही नहीं मिलती बल्कि यह शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक जीने की पद्धति है। हम अपने जीवन में आयुर्वेदिक औषधियों को अपनाकर न केवल रोगों से मुक्ति पा सकते हैं बल्कि स्वास्थ्य व आरोग्य जीवन प्राप्त करते हैं।

विभाग के विभागाध्यक्ष और संगोष्ठी के मुख्य संयोजक प्रो. मुकेश कुमार ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य एवं सफाई हम सभी की नित्य दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए। बीमारियों को रोकने के लिए स्वस्थ वातावरण बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमें प्रतिदिन योग तथा व्यायाम करना चाहिए।

संगोष्ठी की मुख्य सचिव डाॅ. वरिन्द्र विर्क ने कहा कि अनुशासित एवं सामंजस्य बनाकर वेदों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार जीवनयापन कर हम अपने को आरोग्य व स्वस्थ रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें स्वास्थ्य व आरोग्य रहने के लिए शाकाहारी भोजन, फल, हरी सब्जियों, साबुत अनाज व प्रोटीनयुक्त दालों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। संगोष्ठी के सचिव डा. चिरंजीव बनर्जी ने कहा कि हमारे द्वारा ग्रहण किया गया भोजन हमारे जीवन की दिनचर्या को प्रभावित करता है। ऐसे में हमें शाकाहारी भोजन करना चाहिए, साथ ही धूम्रपान व मदिरापान से बचना चाहिए।

इस अवसर पर डाॅ. विनित विश्नोई व डाॅ. संदीप कुमार ने कहा कि हमें वैदिक जीवन पद्धति से जुड़कर अपना व समाज का उत्थान करने की दिशा में अग्रसर होना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. मुकेश कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा पोस्टर व पावर पाइंट प्रजेंटेशन प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर डाॅ. राकेश भुटियानी, डाॅ. रविन्द्र कुमार, डाॅ. कपिल गोयल, डाॅ. भारत वेदालंकार, डाॅ. ऋचा सैनी, डाॅ. सुनीता रानी, डाॅ. प्रदीप सैनी, अमरीश कुमार, अरूण कुमार, मनोज सिंह, गुरप्रीत सिंह, शमेन्द्र रतुड़ी एवं विभिन्न शोध छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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