प्रेस क्लब सभागार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए गीता बेन ने कहा कि अपनी जमा पूंजी से इस ट्रस्ट की सम्पत्ति क्रय की थी। ट्रस्ट में 05 नवम्बर 2001 को महासचिव के रूप में प्रेमानन्द निवासी गायत्री विहार कालोनी, भूपतवाला. विनोद बन्द, अहमदाबाद गुजरात को कोषाध्यक्ष और ललित पुरी गायत्री विहार कालोनी को एक ट्रस्टी बनवाया, कुल 4 सदस्यीय ट्रस्ट बने, तब से वह संस्थापक अध्यक्ष के रूप में कार्य करती रही।

कहा कि प्रेमानन्द महासचिव और ललितपुरी की गतिविधियां संस्था के नियमों के विरूद्ध चलने लगी, जिससे संस्था की छवि खराब होने लगी। रोकने का प्रयास करने पर अभद्रता की गई। ट्रस्ट के संविधान में अध्यक्ष द्वारा ही व्यवस्थापक को मनोनीत करने का अधिकार है। जब ललितपुरी और प्रेमानन्द मुझे जान से मारने की धमकी देकर मेरे आश्रम को हड़पने की साजिशें करने लगे। तब 18 जुलाई 2025 को बाहेसियत अध्यक्ष ट्रस्ट सम्पत्ति को खुर्द-बुर्द होने से बचाने के लिए और अपनी निजी सेवा व देखरेख के लिए सरोजिनी गिरि को आजीवन अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसी तिथि को जिला मजिस्ट्रेट हरिद्वार को एक पत्र दिया, जिसमें बताया गया कि प्रेमानंद और ललित पुरी संस्थागत संपत्ति को नष्ट करना चाहते हैं और मेरी जान को इनसे खतरा हो सकता है।

उन्होंने कहा कि 19 अगस्त को दोपहर करीब 2 बजे ललित पुरी, संजय, अरविंद आदि के साथ छत से अनाधिकृत रूप से आए और धमकाने लगे कि तुमने सरोजिनी गिरि के नाम वसीयत क्यों बनाई। सरोजिनी गिरि ने जब बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उन्होंने उन्हें धक्का दिया और उनके कपड़े फाड़ दिए और एक लाख सत्तर हजार रुपये, चांदी के बर्तन आदि जबरदस्ती छीन लिए। ललितपुरी ने दरवाजा खोला तो पार्षद आकाश भाटी और प्रेमानंद कुछ अन्य लोगों के साथ अंदर घुस आए। उन्हें घायल कर दिया गया और जान से मारने की धमकी देकर आश्रम से बाहर निकाल दिया गया।

इस मामले में पुलिस भी कोई कार्यवाही करने को तैयार नहीं है। अनाधिकृत लोग आश्रम में घुसे हुए हैं। उन्होंने आश्रम में रखा सामान, आश्रम पर कब्जा और रिपोर्ट दर्ज कराने की गुहार लगायी है।

By editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights