इस मौके पर दर्शन विभाग से डॉ. बबीता शर्मा ने बताया कि लड़कियों में मासिक धर्म एक जैविक प्रक्रिया है, जो पूर्व के वर्षों में 13 से 14 वर्ष के दौरान शुरू होती थी। परन्तु वर्तमान में विभिन्न प्रकार के परिवर्तनों के कारण इसकी शुरू होने की उम्र 11 वर्ष हो गई है। मासिक धर्म के दौरान उपयोग किए गए सैनिटरी पैड को हर 4 से 6 घंटे में बदलना चाहिए। पेट में दर्द होने पर सिकाई, बड़ी इलायची या तुलसी की चाय दर्द में राहत का काम करती है।

डॉ. बबीता ने बताया कि मासिक धर्म में उचित स्वच्छता न रखने पर पूरिनरी ट्रैक इंस्फेक्शन, फंगल इन्फेक्शन जैसी कई समस्याएं हो सकती है। जितना हो सके उतना प्राकृतिक उपायों का प्रयोग कर समस्या का निदान करें। मासिक धर्म उत्पादों को सही तरीके से निस्तारित करना भी छात्राओं की जिम्मेदारी है।

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