अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा है कि अमेरिका को वैश्विक स्तर पर प्रतिभाशाली लोगों को आकर्षित करना होगा, क्योंकि देश में “कुछ खास प्रतिभाएं नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि केवल अमेरिकी बेरोजगारों को नियुक्त करके उन्नत तकनीकी उद्योगों की जरूरतें पूरी नहीं की जा सकतीं। फॉक्स न्यूज की लॉरा इंग्राहम को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “अगर आप वेतन बढ़ाना चाहते हैं तो विदेशी कामगारों को रोकने की बात ठीक है, लेकिन अमेरिका को प्रतिभाओं की ज़रूरत है। हमारे पास वो खास टैलेंट नहीं है जो आधुनिक उद्योगों को चाहिए।”
 

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जॉर्जिया में बैटरी बनाने वाले कई दक्षिण कोरियाई कामगारों को हटाने की कोशिश की गई, लेकिन “ऐसे प्रशिक्षित लोग ढूंढना बेहद मुश्किल है।” ट्रंप ने कहा कि बैटरी निर्माण, मिसाइल और हाई-टेक उद्योग “साधारण मजदूरों के बस की बात नहीं।” राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उनका प्रशासन एच-1बी वीजा में दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त कदम उठा रहा है। सितंबर 2025 में जारी आदेश के तहत, नई एच-1बी याचिकाओं के लिए कंपनियों को 1 लाख डॉलर का अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

अमेरिकी श्रम विभाग ने हाल ही में 175 से अधिक जांचें शुरू की हैं, जिनमें कम वेतन, फर्जी कार्यस्थल और ‘बेंचिंग’ जैसी गड़बड़ियों की पड़ताल की जा रही है।भारतीय पेशेवर  खासतौर पर आईटी इंजीनियर और डॉक्टर  एच-1बी वीजा धारकों का सबसे बड़ा समूह हैं। ट्रंप ने कहा कि सुधारों का उद्देश्य अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करते हुए “प्रतिभाशाली विदेशी” लोगों के लिए एक पारदर्शी प्रणाली बनाना है।

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