कार्यक्रम का शुभारंभ पटेल चौक से हुआ, जहां देश की 25 प्रमुख नदियों से एकत्र किए गए पवित्र जल से भारत के लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का जलाभिषेक किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरदार पटेल के चरणों का अभिषेक किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभिषेक केवल श्रद्धा का प्रतीक नहीं बल्कि यह एकता, अखंडता और समर्पण की उस भावना का प्रतीक है, जिसे सरदार पटेल ने देश की आत्मा में प्रवाहित किया था।

उन्होंने बताया कि दिल्ली के विद्यार्थियों ने देश की 25 पवित्र नदियों जैसे झेलम, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा, गोदावरी आदि से जल एकत्र किया, जो भारत की विविध सांस्कृतिक धाराओं और एकात्म चेतना का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जीवंत राष्ट्रपुरुष है, जिसकी चेतना हमारी नदियों में प्रवाहित होती है।

मुख्यमंत्री ने इसके बाद ‘यूनिटी मार्च’ का नेतृत्व किया, जो पटेल चौक से नेशनल वॉर मेमोरियल तक आयोजित हुई। इस मार्च में विद्यार्थियों, एनएसएस स्वयंसेवकों, माय भारत के युवाओं और शिक्षकों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मार्च मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की विविधता में निहित एकता के उस विचार का जीवंत प्रदर्शन थी, जिसे सरदार पटेल ने अपने जीवन से साकार किया।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आयोजित ‘यूनिटी मार्च’ के दौरान चारों ओर लहराते तिरंगे भारत की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक बन गए। हर हाथ में तिरंगा और हर कदम पर उठता जयघोष इस बात का प्रमाण था कि भारत भले विविधताओं से भरा है, पर उसकी आत्मा सदैव एक है। पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति, उत्साह और गर्व की भावना से ओतप्रोत हो उठा। इस अवसर पर दिल्ली के विभिन्न विद्यालयों के बच्चों ने देशभक्ति गीतों और नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सुंदर रूप से अभिव्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह 150वीं जयंती देश के लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी जैसे उस महान विभूति की है, जिन्होंने पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोकर एकता और अखंडता का नया युग स्थापित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में सरदार पटेल जी की जयंती को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाने की परंपरा शुरू की, जिससे आज प्रत्येक भारतीय उनके आदर्शों से प्रेरणा ले रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर को अखंड भारत और एक भारत, श्रेष्ठ भारत के संकल्प को सशक्त करने वाला ऐतिहासिक क्षण बताया।

इस अवसर पर आशीष सूद ने कहा कि विभाजन की सबसे कठिन घड़ी में जब दिल्ली टूट रही थी और लाखों शरणार्थी हिंदू खुले आसमान के नीचे असहाय खड़े थे, तब सरदार वल्लभभाई पटेल इस शहर के सबसे बड़े संरक्षक बनकर सामने आए। उन्होंने कानून-व्यवस्था संभाली, राहत शिविर खड़े किए और पंजाब, सिंध व सीमांत प्रांत से आए हर विस्थापित परिवार को यह भरोसा दिलाया कि दिल्ली अब उनका घर है। आज दिल्ली की जो विविधता, साहस और जीवटता हम देखते हैं, वह उसी दूरदर्शिता की देन है, जिसने न केवल रियासतों को जोड़ा। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि इतिहास केवल लिखा नहीं जाता बल्कि विचारों और कर्मों से जिया जाता है।

उन्होंने बताया कि ‘जल संगम से जन संगम’ की इस यात्रा में 150 विद्यार्थी और शिक्षक देश की 25 सांस्कृतिक नदियों से जल एकत्र कर यमुना के संगम में अर्पित करेंगे। यह जल भारत की एकता का प्रतीक है।

दिल्ली के बच्चे कश्मीर की झेलम, असम की ब्रह्मपुत्र, गुजरात की नर्मदा और दक्षिण की गोदावरी जैसी पवित्र नदियों से यह जल लेकर आए हैं। इस प्रयास का संदेश स्पष्ट है की भारत कोई भूमि का टुकड़ा नहीं बल्कि एक जीवंत राष्ट्रपुरुष है। यह चेतना हमारी नदियों में बहती है, हमारे सैनिकों की धड़कनों में बसती है और हमारी बेटियों की आँखों में चमकती है।

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By editor

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