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इस अवसर पर उन्होंने सेवारत और पूर्व नौसैनिकों से मुलाकात की और संवाद किया। नौसेना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए वीर सपूतों और सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारियों (वेटरन्स) को विशेष रूप से नमन कियाए जिन्हाेंने अपने साहस, समर्पण और कुशल नेतृत्व से हमारे समुद्री हितों की रक्षा में अहम योगदान दिया।

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को अपनाते हुए अपनी क्षमताओं को लगातार सुदृढ़ किया है। उन्होंने एआई,स्वायत्त प्रणाली और उपग्रह दूरसंवेदन जैसी उभरती तकनीकों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इनका उपयोग समुद्री संचालन में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। एनएचओ इन आधुनिक तकनीकों को अपनाकर नौसेना समुद्री शक्ति के क्षेत्र में अग्रणी बनी हुई है।

राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय हाइड्रोग्राफिक कार्यालय (एनएचओ) भारतीय नौसेना का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह हमारे समुद्रों और जलमार्गों का सटीक मानचित्रण करता है,जिससे नौसेना और तटरक्षक बल हमारे समुद्री सीमाओं के रक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभा सकें। उन्होंने कहा कि एनएचओ की ओर से तैयार आंकड़े और मानचित्र युद्धपोतों, पनडुब्बियों, बंदरगाह विकास और ब्लू इकॉनमी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1954 में स्थापित यह संस्था वर्तमान में भारत सरकार के मुख्य हाइड्रोग्राफर वाइस एडमिरल लोचन सिंह पठानिया, एवीएसएम के नेतृत्व में कार्यरत है और देश के सभी समुद्री जहाज़ों हेतु इलेक्ट्रॉनिक नेविगेशन चार्ट,पेपर चार्ट और नौटिकल प्रकाशनों के निर्माण की प्रमुख राष्ट्रीय एजेंसी है।भारतीय नौसेना हर वर्ष 04 दिसम्बर को 1971 के युद्ध में मिली ऐतिहासिक विजय की स्मृति में नेवी डे मनाती है। इस वर्ष का थीम है’लड़ाकू के लिए तैयार, एकजुट, आत्मनिर्भर-विकसित समृद्ध भारत के लिए समुद्र की सुरक्षा।’

इस अवसर पर चीफ हाइड्रोग्राफर वाइस एडमिरल लोचन सिंह पठानिया, ज्वाइंट चीफ हाइड्रोग्राफर रियर एडमिरल पीयूष पावसी सहित सेवारत और नौसेना के भूतपूर्व अधिकारी उपस्थित रहे।

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