गांवों में खड़िया खनन से आई दरारों के मामले में हाई काेर्ट में सुनवाई जारी

हाई काेर्ट ने डिप्टी डायरेक्टर ज्युलोजिकल काे पेश होने के दिए निर्देश

नैनीताल, 14 फ़रवरी (हि.स.)। हाई कोर्ट ने बागेश्वर जिले की तहसील कांडा के कई गांवों में खड़िया खनन से आई दरारों के मामले में स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई के लिए 17 फरवरी की ति​थि नियत की है। साथ ही कोर्ट ने अगली तिथि तक खड़िया खनन पर लगी रोक को जारी रखा है।

कोर्ट ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए डिप्टी डायरेक्टर ज्युलोजिकल खनन इकाई उत्तराखंड को व्यक्तिगत रूप से व कमेटी के अन्य सदस्यों से वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बागेश्वर जिले के 61 खड़िया खदानों की जांच रिपोर्ट न्यायालय में पेश की। कोर्ट ने रिपोर्ट का अवलोकन किया। कोर्ट ने संतुष्टि के लिए गठित कमेटी के अध्यक्ष डिप्टी डायरेक्टर ज्युलोजिकल खनन इकाई उत्तराखंड को स्वयं व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में 17 फरवरी को पेश होने के आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने अगली तिथि तक खड़िया खनन पर लगी रोक को जारी रखा है।

कोर्ट ने कहा कि इस क्षेत्र में अवैध खनन से ग्रामीणों को हो रहे नुकसान की भरपाई का मुआवजा सरकार से न कराकर अवैध खननकर्ताओं से वसूल किया जाना चाहिए। सुनवाई पर राज्य सरकार ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने खड़िया खनन पर लगे कई बड़ी मशीनों को सीज कर दिया है। खुदानों कि निगरानी ड्रोन कैमरों से की जा रही है। जिसकी वर्तमान रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जा चुकी है।

मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र एवं वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार कांडा तहसील के ग्रामीणों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर कहा था कि अवैध खड़िया खनन से उनकी खेतीबाड़ी, घर, पानी की लाइनें चोपट हो चुकी है। जो धन से सपंन्न थे उन्होंने अपना आशियाना हल्द्वानी व अन्य जगह पर बना दिया है। अब गावों में निर्धन लोग ही बचे हुए है। उनके जो आय के साधन थे उन पर अब खड़िया खनन के लोगों की नजर टिकी हुई है। इस संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों को प्रत्यावेदन दिए गए लेकिन उनकी समस्या का कुछ हल नही निकला। इसलिए अब हम न्यायालय की शरण में आए है। उनकी समस्या का समाधान किया जाए।

लता नेगी

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By admin

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