वही, छात्र-छात्राओं ने मेले में पहली बार आयोजित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बतौर मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। उन्होंने देवलेश्वर महादेव के दर्शन कर जिले की सुख-समृद्धि की कामना की।

रविवार को मेले के दूसरे दिन का उदघाटन करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि देवलेश्वर महादेव मंदिर इस घाटी के 34 से अधिक गाँवों की आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखता है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि लोक परंपरा, लोककला और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है।

समिति की मांग पर जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि मंदिर के ऊपरी भाग पर टाइल्स की जगह शिल्प सम्बन्धी कार्य के अलावा इतिहास, स्थापत्य और विरासत को सहेजने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे तथा मंदिर परिसर में सूचना-पट्ट (साइनेज) लगाए जाएंगे, ताकि इस तीर्थ की पहचान केवल घाटी तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे जनपद और प्रदेश तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि देवलेश्वर महादेव मंदिर हमारी लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।

यहां के मेले-थौले और पारंपरिक आयोजन इस क्षेत्र की जीवंत सांस्कृतिक विरासत हैं। हमें इन्हें सहेजने और नयी पीढ़ी तक पहुँचाने की सामूहिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए। इस अवसर पर मंदिर की आरती एवं स्तुति पुस्तिका का विमोचन किया गया। इस मौके पर तहसीलदार दीवान सिंह राणा, ग्राम प्रधान बलोड़ी पूजा देवी, मंदिर समिति के अध्यक्ष केसर सिंह कठैत,समिति के सचिव जगत किशोर बड़थ्वाल, संचालक नागेंद्र जुगराण आदि शामिल रहे।

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