लखनऊ। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत चल रही फर्जीवाड़े की परतें अब खुलने लगी हैं। जांच में सामने आया है कि कुछ जालसाजों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के पोर्टलों में हेराफेरी कर मोबाइल नंबरों में बदलाव किया और इन बदले हुए नंबरों पर ओटीपी प्राप्त कर लॉगिन किया गया। इसी माध्यम से सैकड़ों फर्जी आयुष्मान कार्ड जारी कराए गए।जानकारी के अनुसार, आधार प्रमाणीकरण प्रणाली में फर्जी दस्तावेजों और नकली पहचान के सहारे यह खेल खेला गया। बीते कुछ हफ्तों में की गई प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि लगभग 400 से अधिक आयुष्मान कार्ड फर्जी तरीके से बनाए गए और इनमें से करीब 250 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती भी दिखाया गया।

संदेह है कि कई मामलों में मरीजों को केवल कागजों पर ही भर्ती और इलाज किया गया, ताकि इलाज के नाम पर सरकारी भुगतान हासिल किया जा सके।स्टेट एजेंसी फॉर कम्प्रेहेन्सिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) ने इस घोटाले की जांच शुरू कर दी है। सोमवार को दस्तावेजों की गहन पड़ताल के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि जांच में फर्जी कार्ड बनाने, उनका उपयोग कर इलाज दिखाने और भुगतान की प्रक्रिया तक सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।अर्चना वर्मा ने स्पष्ट किया कि सभी फर्जी आयुष्मान कार्ड रद्द कर दिए गए हैं और इनके तहत पंजीकृत केस रिजेक्ट कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “जिन मरीजों का इलाज इन कार्डों से हुआ है, उनकी भी जांच होगी। कार्ड बनाने में कितना पैसा लिया गया, किन अस्पतालों ने भर्ती दिखाया, और किसने फर्जीवाड़े को अंजाम दिया — यह सब पता लगाया जाएगा।”सूत्रों के अनुसार, करीब 20 दिन पहले एनएचए पोर्टल से साचीज अधिकारियों और कर्मचारियों के आधार से जुड़े मोबाइल नंबरों में गुप्त रूप से बदलाव किए गए थे।

उसी के बाद से ही इस बड़े नेटवर्क ने सक्रिय होकर कार्ड बनवाने और इलाज दिखाने की प्रक्रिया शुरू की।फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए राज्य स्तर की जांच टीम गठित कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी अस्पताल की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।आयुष्मान योजना गरीबों के लिए वरदान मानी जाती है, लेकिन इस घोटाले ने सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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