विवादित अमेरिकी फाइनेंसर और यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा का नाम आने के बाद पूरी दुनिया में चर्चा शुरू हो गई है। रविवार को दलाई लामा के ऑफिस ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन मीडिया रिपोर्ट्स का कड़ा खंडन किया। ऑफिस ने साफ तौर पर कहा कि दलाई लामा का एपस्टीन से किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं रहा है।

क्या है पूरा विवाद?

हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन केस से जुड़े लाखों दस्तावेज और वीडियो जारी किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन फाइलों में दलाई लामा का नाम कथित तौर पर 169 बार आया है।

 

कुछ फाइलों में ‘मसाज फॉर डमीज’ नामक किताब और पुराने ईमेल के स्क्रीनशॉट मिले हैं, जिनमें दलाई लामा का जिक्र था। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि 2012 के आसपास उनके और एपस्टीन के बीच किसी मुलाकात की योजना बनाई गई थी।

दलाई लामा के ऑफिस ने क्या कहा?

इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए दलाई लामा के ऑफिस ने बयान दिया। बयान के अनुसार, हम स्पष्ट करते हैं कि महामहिम दलाई लामा कभी भी जेफरी एपस्टीन से नहीं मिले हैं। न ही उन्होंने अपनी ओर से किसी व्यक्ति को उनसे मिलने या बात करने की अनुमति दी है। सोशल मीडिया और मीडिया में चल रही ये खबरें निराधार हैं।

 

पुराने दावे

यह मुद्दा पहली बार चर्चा में नहीं आया है। पिछले साल पत्रकार माइकल वोल्फ ने एक पॉडकास्ट में दावा किया था कि एपस्टीन के न्यूयॉर्क स्थित घर पर होने वाली सभाओं में कई दिग्गज शामिल होते थे, जिनमें उन्होंने दलाई लामा का भी नाम लिया था। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोई संपर्क हुआ भी होगा, तो वह केवल परोपकारी कार्यों या दान के सिलसिले में हो सकता है, क्योंकि एपस्टीन कई बड़ी हस्तियों को आर्थिक मदद देने के लिए जाना जाता था।

 

फाइलों में किस-किस के नाम हैं?

अमेरिकी विभाग द्वारा जारी इन 30 लाख से ज्यादा दस्तावेजों में केवल दलाई लामा ही नहीं, बल्कि दुनिया की कई अन्य प्रभावशाली हस्तियों के नाम भी शामिल हैं। इनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और बिल क्लिंटन के साथ-साथ बिल गेट्स और एलोन मस्क जैसे बड़े उद्योगपतियों के नामों का भी जिक्र है।

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