भ्रमण कार्यक्रम में वन विभाग की मेघा बिष्ट ने नर्सरी निर्माण की तकनीकी, मिट्टी, गोबर और सेंड का अनुपात, बीज बोने का उपयुक्त समय, उपयोगी पादप प्रजातियों के बारे में छात्र-छात्राओं को विस्तार से बताया। वनस्पति विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. प्रकाश फोंदणी ने कहा कि बहुउपयोगी औषधीय पौधों आंवला, लेमनग्रास, तेजपत्ता, बांझ, बुरांश, काफल, देवदार, मेलू, पय्या, कैक्टस, शहतूत, नीम, तुन, चूला, आदि की नर्सरी तैयार करके और फ्लोरीकल्चर के तहत कॉमर्शियल कटफ्लावर ग्लैडुला, लिलियम आदि की खेती को तैयार करके भी हम अपना कौशल विकास के साथ-साथ स्वरोजगार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर सकते हैं।
छात्र-छात्राओं ने कहा कि प्राकृतिक रूप से मौके पर देखने से वास्तविक जानकारी हुई हैं जो कि बहुत ही अच्छा लगा। इस मौके पर प्राचार्य डा. विजय कुमार अग्रवाल, डा. कुमार गौरव जैन, प्रयोगशाला सहायक प्रवीन, अर्चना आदि शामिल रहे।
