सम्मेलन में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम, राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, विभिन्न मंत्रालयों के केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, जिला उपायुक्त, आदि कर्मयोगी, आदि साथी एवं राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने बताया कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू किया गया आदि कर्मयोगी अभियान अब विश्व का सबसे बड़ा आदिवासी नेतृत्व मिशन बन चुका है। इसके तहत 20 लाख से अधिक अधिकारियों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं और आदिवासी युवाओं को 1 लाख से अधिक आदिवासी गांवों में प्रशिक्षित किया गया है।
राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि यह मिशन सामुदायिक नेतृत्व आधारित परिवर्तन की राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन चुका है, जो आत्मनिर्भरता, नवाचार और अभिसरण को बढ़ावा देता है।
सचिव विभू नायर ने पांच प्रमुख क्षेत्रों—शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, अवसंरचना और सुशासन— में अभिसरण आधारित मॉडल की सफलता पर प्रकाश डाला और ‘सेवा, समर्पण और संकल्प’ की भावना को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
सम्मेलन में पांच थीमैटिक सत्रों में गहन विमर्श
हुआ जिसमें के दौरान सुशासन एवं संस्थागत सुदृढ़ीकरण, शिक्षा एवं कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं पोषण, आजीविका एवं उद्यमिता, तथा अवसंरचना शामिल है। इन पांच स्तंभों पर राज्यवार रणनीतियों और ग्राम कार्ययोजनाओं के आधार पर चर्चा हुई।
इन सत्रों के निष्कर्षों के आधार पर नीतिगत सुधार, दिशा-निर्देशों का अद्यतन और नवाचार व प्रौद्योगिकी आधारित सफल मॉडलों को पूरे देश में लागू करने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
सम्मेलन के दौरान ट्राइबल बिज़नेस कॉन्क्लेव 2025 की घोषणा की गई, जो 12 नवंबर 2025 को आयोजित होगा। यह कार्यक्रम आदिवासी स्टार्टअप, कारीगरों, उत्पादक समूहों और सहकारी समितियों के लिए उद्यमिता और बाज़ार से जुड़ाव का बड़ा मंच प्रदान करेगा।
इसके साथ
उत्कृष्ट प्रदर्शकों को सम्मान
पीएम-जनमान, धरती आबा जनभागीदारी अभियान और आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों, राज्यों, जिलों, मास्टर ट्रेनरों, आदि साथियों और आदि सहयोगियों को सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति ने 45 से अधिक श्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ताओं को स्मृति चिह्न प्रदान किए और 50 से अधिक फील्ड स्तर की सराहनीय पहलों को प्रदर्शित करने वाली स्क्रॉल का अनावरण किया।
