नई दिल्ली, 17 फ़रवरी । दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के दोषी कुलदीप सिंह सेंगर के भाई जयदीप सेंगर की अंतरिम जमानत 20 फरवरी से आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया कि वो ये बताएं कि क्या जयदीप सेंगर की तबीयत इतनी खराब है कि उनकी अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ा दी जाए। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी।
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने जयदीप सेंगर की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उन्होंने जो मेडिकल रिपोर्ट दाखिल की है वो सही नहीं है। सीबीआई ने कहा कि जयदीप सेंगर को उपयुक्त समय सीमा के भीतर कोर्ट के सामने पेश होना चाहिए था। तब कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने भी वेरिफिकेशन रिपोर्ट दाखिल नहीं की है। आप वेरिफिकेशन रिपोर्ट दाखिल करें कि क्या जयदीप सेंगर की अंतरिम जमानत बढ़ाने की जरुरत है।
कोर्ट ने 9 फरवरी को जयदीप सेंगर की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया था। जयदीप सेंगर ने याचिका दायर कर कहा है कि वह मुंह में एडवांस स्टेज के कैंसर से पीड़ित है। उनमें कैंसर के दोबारा होने के लक्षण दिख रहे हैं। इसके इलाज के लिए उन्हें चिकित्सकीय सहायता की जरुरत है। जयदीप सेंगर ने तीन महीने की अंतरिम जमानत बढ़ाने की की मांग की है। जयदीप सेंगर की अंतरिम जमानत की समय सीमा 11 फरवरी को समाप्त हो रही है।
मामले में कुलदीप सिंह सेंगर के अलावा जयदीप सेंगर को भी ट्रायल कोर्ट ने दस साल की सजा सुनाई है। जयदीप सेंगर को इसके पहले भी कोर्ट अंतरिम जमानत दे चुका है।
इस मामले में 16 दिसंबर 2019 को तीस हजारी कोर्ट ने पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत मामले में कुलदीप सिंह सेंगर समेत सातों आरोपितों को दस-दस साल की कैद और दस-दस लाख रुपये के जुर्माने की सजा की सजा सुनाई थी। दुष्कर्म पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में 9 अप्रैल 2018 को मौत हो गई थी। चार जून 2017 को पीड़िता ने जब कुलदीप सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था उसके बाद कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह और उसके साथियों ने पीड़िता के पिता को बुरी तरह पीटने के बाद पुलिस को सौंप दिया था। पीड़िता के पिता को जेल में शिफ्ट करने के कुछ ही घंटों बाद जिला अस्पताल में मौत हो गई थी।
20 दिसंबर 2019 को मामले में तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने उम्रकैद के अलावा 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। जुर्माने की इस रकम में से 10 लाख रुपये पीड़िता को देने का आदेश दिया था।
