उन्होंने बताया कि झोले का टोकन नंबर कैदी को बताया जाएगा। इसके बाद सामानों की जांच कर टोकन नंबर के अनुसार कैदी को झोला सौंप दिया जाएगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत एक जैसा झूला रखा गया है, जिसे नंबर से ही पहचाना जाएगा। इससे बाहर से आने वाली सामग्री की विधिवत जांच भी हो जाएगी और कैदी को उसका सामान भी मिल जायेगा।
