मुरादाबाद, 31 अक्टूबर । कुंज बिहारी महिला मंडल के तत्वावधान में सिविल लाइन स्थित पुलिस लाइन मंदिर में आयोजित संगीतमय नाै दिवसीय श्री राम कथा के छठे दिन शुक्रवार को कथावाचक आचार्य व्योम त्रिपाठी ने जनकपुर से विवाहोपरांत माता सीता जी की विदाई, अयोध्या में राजा दशरथ की चारों पुत्र वधुओं का स्वागत व दासी मंथरा तथा कैकई की कुटिल नीति के संवाद का वर्णन किया। माता सीता की विदाई का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए।
कथावाचक आचार्य व्योम त्रिपाठी ने कहा कि बड़े भाग्य से यह मनुष्य शरीर प्राप्त होता है। मनुष्य शरीर देवताओं के लिए भी दुर्लभ माना गया है। मनुष्य शरीर की सार्थकता सत्संग व साधना करने में ही है । ऐसा विश्वास करना चाहिए कि सत्संग से सभी दु:ख नष्ट हो जाते हैं। यह मानव शरीर सत्संग और ध्यान करने का घर व मोक्ष का द्वार है। मनुष्य शरीर परमात्मा का ही अंश है और सत्संग व साधना करके इसी मनुष्य शरीर से परमात्मा पद को प्राप्त किया जा सकता है। सत्संग से संस्कार कभी खत्म नहीं होता है। सच्चे संत के दर्शन मात्र से मन का मैल समाप्त हो जाता है। संतो के उपदेश पर चलने पर ही कल्याण संभव है।
इस दौरान आचार्य ने कहा कि माता सुनैना ने विदाई के समय सीता जी को संस्कार, बड़ों का आदर, सास ससुर का सम्मान व लोगों के प्रति आदर भाव के व्यवहार की बात बताई। सीता जी की विदाई के समय मिथिलावासी रो उठे। दूसरी तरफ जब चारों भाई जनकपुरी से अयोध्या नगर में पहुंचे तो चारों ओर उत्सव का माहौल बन गया।
मुख्य यजमान डॉ शशि अरोड़ा व अशोक अरोड़ा रहे। दैनिक यजमान दैनिक यजमान उमा शर्मा व राज मित्तल रहे। इस मौके पर निमित जायसवाल, किरन सिक्का, शिवानी शर्मा, मानवी मुंजियाल, नीलम अग्रवाल, मीरा गुप्ता, शिक्षा गोयल, मोनिका अग्रवाल, अनिल भगत, सनी भारद्वाज, रोहिणी कंसल, अंजू मेहरोत्रा शालिनी अग्रवाल आदि उपस्थित रहीं।
