शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में धार्मिक पर्यटन को नई उड़ान देने जा रही योगी सरकार

म्यूजिकल फाउंटेन और लेज़र शो के जरिए मां पाटेश्वरी देवी की महिमा से परिचित होंगे श्रद्धालु

लखनऊ, 18 मई (हि.स.)। योगी सरकार प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए कई नवाचार कर रही है। इसी कड़ी में बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में स्थित ऐतिहासिक देवीपाटन मंदिर में श्रद्धालुओं काे आकर्षित करने के लिए पहलकर रही है। सरकार यहां एक तैरता संगीतमय फव्वारा (फ्लोटिंग म्यूजिकल फाउंटेन), मल्टीमीडिया लेजर शो, बीम प्रोजेक्शन और पानी की स्क्रीन पर वीडियो प्रोजेक्शन स्थापित करने जा रही है।

ऐतिहासिक देवीपाटन मंदिर के आसपास यह परियोजना न केवल मंदिर के सौंदर्य को बढ़ाएगी, बल्कि पर्यटकों और श्रद्धालुओं को एक अनूठा अनुभव भी देंगी। सरकार का लक्ष्य है कि इस धार्मिक स्थल पर आधुनिक सुविधाओं और आकर्षणों के माध्यम से अधिक से अधिक तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं को आकर्षित किया जाए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिले और रोजगार के अवसर बढ़ें।

इस परियोजना में क्या होगा खास? योगी सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत देवीपाटन मंदिर में रंग-बिरंगी रोशनी और संगीत के साथ तैरता संगीतमय फव्वारा लगाने जा रही है। यह श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध करेगा। मल्टीमीडिया लेजर शो में मां पाटेश्वरी की कथाओं और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करेगा, जबकि पानी की स्क्रीन पर 15-20 मिनट का वीडियो शो हिंदी और अंग्रेजी में पेशेवर वॉयस ओवर और एनिमेशन के साथ मंदिर का इतिहास दर्शाएगा।

सरकार का विशेष जोर है कि विश्वस्तरीय ब्रांड के टिकाऊ उपकरण, जिनकी आयु कम से कम 10 वर्ष हो, इस परियोजना को और भव्य बनाएं। मात्र 180 दिनों में डिजाइन से लेकर स्थापना तक का काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसमें 30 दिन डिजाइन स्वीकृति, 60 दिन उपकरण आपूर्ति, 60 दिन स्थापना और 30 दिन सिस्टम शुरू करने में लगेंगे। इसके बाद 5 साल तक मुफ्त रखरखाव, सफाई और मरम्मत सुनिश्चित कर यह परियोजना मंदिर के सौंदर्य और पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

51 शक्तिपीठों में से एक है मां पाटेश्वरी का ये धामदेवीपाटन मंदिर के महंत मिथिलेश नाथ योगी के अनुसार देवीपाटन मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जो मां पाटेश्वरी देवी को समर्पित है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहां माता सती का बायां कंधा गिरा था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना महाभारत काल में पांडवों ने की थी। मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व इसे देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र बनाता है। नवरात्र के दौरान यहां लाखों भक्त मां के दर्शन के लिए उमड़ते हैं। इसके अलावा, मंदिर के पास स्थित प्राचीन कुंड और आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को भी लुभाता है।

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