वाराणसी,5 नवंबर । देव दीपावली पर्व पर बुधवार शाम काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ के नगरी में और उत्तर वाहिनी गंगा नदी के अर्धचंद्राकार पथरीले घाटों पर इंद्रलोक सरीखा नजारा दिखेगा। गंगा किनारे के ऊंचे भवनों, धर्मशालाओं, मंदिरों पर दीपों की दपदप, सतरंगी विद्युत झालरों की जगमग, सुरों की खनक, गीत-संगीत के बीच ग्रीन आतिशबाजी और लेजर शो के साथ फूलों से सजे दशाश्वमेध और प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर भव्यतम गंगा आरती का आकर्षण लोगों को अपनी ओर खींच रहा है।

शाम ढलते ही गंगा के दोनों किनारों पर 25 लाख से अधिक दीये एकसाथ जलेंगे तो लोगों को समानांतर ज्योति गंगा का एहसास होगा। पूर्णिमा के चांद और दीयो की रोशनी के बीच कल-कल बहती गंगा की लहरों पर अद्भुत अलौकिक नजारा दिखेंगा। इस पल का साक्षी प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित लगभग 20 लाख लोग बनेंगे।

प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार ‘पर्यटन विभाग का उद्देश्य है कि देव दीपावली जैसे आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण पर्यटन को सशक्त किया जाए। इससे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलता है साथ ही अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। ऐसे प्रयासों से उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान प्रदान दिलाने में मदद मिलती है।

उन्होंने बताया कि वाराणसी में दीपोत्सव कार्यक्रम की शुरूआत शाम 5:15 से 5:50 बजे के बीच गंगा घाटों पर दीप प्रज्वलन से होगीं। इसके बाद डमरूवादन व शंखनाद के बीच नमो घाट, दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट और असि घाट पर विशेष गंगा आरती शाम छह बजे से 6:50 बजे तक संपन्न होगी। दशाश्वमेध और राजघाट पर आपरेशन सिंदूर’ की विशेष झलक दिखाई जाएगी। चेत सिंह घाट पर दर्शकों के लिए तीन चरणों में प्रोजेक्शन एवं लेजर शो की प्रस्तुति होगी। पहला शो शाम 6:15 से 6:45 बजे, दूसरा 7:15 से 7:45 बजे और तीसरा शो 8:15 से 8:45 बजे तक चलेगा।

ललिता घाट के सामने रेती पर शाम 8:00 से 8:15 तक ग्रीन आतिशबाजी होगी। देपदीपावली पर अस्सी से नमोघाट के बीच लेजर शो, रंगोली, ग्रीन आतिशबाजी पर्यटकों के लिए खास रहेगी। गंगा के गले में दीपों का चंद्रहार देखने के लिए नागरिक और पर्यटक अभी से बेचैन है। भगवान शिव को समर्पित देव दीपावली पर्व पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा तिलभांडेश्वर महादेव, सारंगनाथ महादेव, बीएचयू स्थित विश्वनाथ मंदिर और दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर और ग्रामीण अंचल के मारकंडेय महादेव सहित सभी प्रमुख मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया गया है।

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