सिरसा ने कहा कि करीब 2000 टीमें दिन-रात ग्राउंड पर काम कर रही हैं। दिल्ली का मॉडल सिर्फ सर्दियों के लिए नहीं, बल्कि सालभर की जवाबदेही और पारदर्शिता पर आधारित है। उन्होंने आगे बताया कि दिल्ली सरकार मौजूदा प्रयासों के साथ भविष्य की तैयारी पर भी काम कर रही है। उन्होंने बताया कि हमारे प्रयास सिर्फ आज के लिए नहीं हैं, बल्कि आने वाले समय को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं। जल्द ही 70 नए मैकेनाइज्ड स्वीपर, 70 अतिरिक्त एंटी-स्मॉग गन, वाटर स्प्रिंकलर और 140 लिटर पिकर लगाए जा रहे हैं जो 1440 किलोमीटर सड़कों को कवर करेंगे। साथ ही इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए ‘दिल्ली क्लीन एयर चैलेंज’ जारी है और आईआईटी कानपुर व आईएमडी के सहयोग से जल्द ही क्लाउड सीडिंग की जाएगी।
उन्होंने बताया कि ट्रांसपोर्ट विभाग और अन्य इकाइयों की 578 टीमें, साथ ही दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की 505 मोबाइल प्रॉसिक्यूशन टीमें (974 अधिकारी), प्रदूषण जांच (पीयूसी), धुआं और इंजन आइडलिंग पर सख्त कार्रवाई कर रही हैं।
सिरसा ने बताया कि 23 अक्टूबर 2025 तक दिल्ली में धूल नियंत्रण के लिए सबसे मजबूत व्यवस्था मौजूद है। 376 एंटी-स्मॉग गन (पिछले साल 335 से बढ़कर), 266 वाटर स्प्रिंकलर (259 से बढ़कर), 91 मैकेनाइज्ड रोड स्वीपर (83 से बढ़कर) उपयोग किया गया। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को भी तेजी से बढ़ाया है, जिसके पीछे की सोच ट्रांसपोर्ट सेक्टर से निकलने वाले प्रदूषण को कम करना है।
सिरसा ने कहा कि हम अब सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि निरंतर नियंत्रण पर ध्यान दे रहे हैं। हर मशीन और हर अधिकारी की जवाबदेही तय है। दिल्ली हवा को कर्म से साफ कर रही है, केवल बातों से नहीं। उन्होंने बताया कि 25 सूत्रीय विंटर एक्शन प्लान के तहत दिल्ली सरकार विज्ञान-आधारित और नागरिक-केंद्रित मॉडल को और मजबूत बना रही है।
सिरसा ने बताया कि दिल्ली का बेहतर होता एक्यूआई दिखाता है कि व्यवस्था असरदार हो रही है। लेकिन हमारा लक्ष्य सिर्फ मौसमी सुधार नहीं बल्कि स्थायी बदलाव है।
