नई दिल्ली, 9 मार्च । दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा कथित शराब नीति घोटाले में निचली अदालत से डिस्चार्ज किए गए 20 आरोपितों को नोटिस जारी करने और निचली अदालत की कुछ टिप्पणियों पर रोक लगाने के फैसले का दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे दिल्ली के पैसे से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की जांच का रास्ता साफ हुआ है।
दिल्ली सचिवालय में सोमवार को आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए आशीष सूद ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आआपा) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के नाम पर राजनीति शुरू की थी, लेकिन न तो 49 दिन की सरकार के दौरान और न ही उसके बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई गंभीर प्रयास दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि अब जांच एजेंसियां और अदालत इस मामले में आगे की कार्रवाई करेंगी।
सूद ने कहा कि हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने निचली अदालत की कुछ टिप्पणियों पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने खुद को जल्दबाजी में कट्टर ईमानदार घोषित कर दिया था, जबकि अब सच्चाई धीरे-धीरे सामने आ रही है।
उन्होंने कहा कि कथित शराब घोटाले से जुड़े साक्ष्य मिटाने के लिए आआपा के नेताओं ने 170 मोबाइल फोन और 43 सिम कार्ड नष्ट किए। उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच एजेंसियों ने सैकड़ों लोगों से पूछताछ की है और कई लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में लगभग 2202.68 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का उल्लेख किया गया है। उनके अनुसार पुरानी शराब नीति में एक बोतल पर सरकार को लगभग 329.90 रुपये का राजस्व मिलता था, जबकि नई नीति में यह घटकर करीब 8.32 रुपये रह गया। साथ ही खुदरा विक्रेताओं का मार्जिन 33.35 रुपये से बढ़ाकर 363.27 रुपये कर दिया गया, जिससे सरकार के राजस्व पर असर पड़ा।
सूद ने कहा कि इसी कारण सरकार को यह नीति वापस लेनी पड़ी, लेकिन इसके बावजूद आम आदमी पार्टी लगातार यह दावा करती रही कि शराब नीति में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अब आम आदमी पार्टी को दिल्ली की जनता को बताना होगा कि मोबाइल फोन और सिम कार्ड क्यों नष्ट किए गए, शराब नीति वापस क्यों ली गई और राजस्व में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई।
