याचिका भूखंड के मालिकों ने दायर किया था। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उस भूखंड को सजावटी पार्क के रूप में उपयोग करने की मांग का कोई मतलब नहीं है। इस भूखंड को दिल्ली नगर निगम ने छात्रों के लिए खेल के मैदान के रूप में निर्धारित किया है। न्यायालय ने कहा कि मॉडल टाउन में आसपास कई पार्क हैं। एक पार्क तो 100 एकड़ में बना है।

याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ताओं ने 1987-88 में दिल्ली नगर निगम को प्रतिवेदन देकर संबंधित भूखंड में बने पार्क को मल्टी स्टोरी स्कूल में तब्दील करने का विरोध किया था। याचिकाकर्ताओं को दिल्ली नगर निगम ने कहा था कि स्कूल का एक अस्थायी शेड बनाया जा रहा है और मुख्य स्कूल कहीं और होगा। नगर निगम के इस आश्वासन के बावजूद निर्माण कार्य चलता रहा, जिसके बाद लोगों और भूखंड के मालिकों ने दीवानी वाद दायर दिया। बाद में नगर निगम से समझौते के बाद दीवानी वाद वापस ले लिया गया।

याचिका में कहा गया था कि स्कूल के अलावा पार्क के बाकी हिस्से में सजावटी पार्क बनाया जाए। लेकिन उसके बावजूद नगर निगम स्कूल का निर्माण कार्य करता रहा। जब नगर निगम ने पार्क की छह फीट ऊंची बाउंड्री के लिए टेंडर जारी किया तो दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गयी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दिल्ली नगर निगम की इस दलील को मंजूर कर लिया कि पार्क का बाकी हिस्सा स्कूल के बच्चों के लिए खेल के मैदान के रुप में प्रयोग किया जाएगा।

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