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मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि गुरु तेग बहादुर का जीवन अत्याचार, धार्मिक असहिष्णुता और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की पूर्ण और जीवंत मिसाल है। वे न केवल सिख धर्म के महान गुरु थे बल्कि संपूर्ण मानवता के संरक्षक भी थे। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर भारत की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की और यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म की रक्षा किसी भी मूल्य पर की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु तेग बहादुर का बलिदान इतिहास की उस अमर घटना का प्रतीक है, जिसने हमें यह सिखाया कि दूसरों की स्वतंत्रता और सम्मान की खातिर त्याग देना ही सच्ची मानवता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब का संदेश साहस, करुणा, सहिष्णुता, भाईचारा और सभी धर्मों के प्रति सम्मान आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना तीन सदियों पहले था।

मुख्यमंत्री ने गुरु तेग बहादुर के व्यक्तित्व व कृतित्व को याद करते हुए कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का जीवन हमें हमेशा एक अधिक न्यायपूर्ण, शांतिपूर्ण और समानता-आधारित समाज बनाने की प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह सार्वजनिक अवकाश केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि दिल्ली सरकार की ओर से गुरु साहिब के बलिदान के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि है। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस दिवस को श्रद्धा, एकता और सेवा-भाव की भावना के साथ मनाएं तथा गुरु साहिब के संदेशों को अपने जीवन में धारण करें।

By editor

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