दिल्ली सरकार ने पिछले सालों से तुलना करते हुए कहा है कि पिछले सात वर्षों में इस तारीख का सबसे अच्छा स्तर है। सरकारी की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 4 नवम्बर को 291 रहा। वहीं 2024 में यह 381, 2023 में 415, 2022 में 447, 2021 में 382, 2020 में 343 और 2019 में 407 था।

दिल्ली सरकार का कहना है कि भौगोलिक चुनौतियों, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने, निर्माण गतिविधियों, वाहनों की बढ़ी हुई संख्या और ग्रीन दिवाली मनाने के बावजूद दिल्ली ने इस बार हवा की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखी है। यह सफलता निरंतर और वैज्ञानिक तरीकों से किए गए प्रयासों का परिणाम है।

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि “साल-दर-साल के आंकड़े यह साबित करते हैं कि हमारी समन्वित और निरंतर प्रदूषण नियंत्रण रणनीति असर दिखा रही है। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार दिल्लीवासियों को साफ़ हवा देने के लिए प्रतिबद्ध है। हम सालभर योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं ताकि सर्दियों में प्रदूषण को काबू में रखा जा सके।”

उन्होंने आगे कहा, “सर्दियों का समय दिल्ली के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है, लेकिन इस बार हमारी टीमें लगातार मैदान में सक्रिय हैं। निगरानी, प्रवर्तन और धूल नियंत्रण जब साथ मिलकर काम करते हैं, तो परिणाम खुद नज़र आने लगते हैं।”

दिल्ली सरकार ने अपने प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा है कि पर्यावरण विभाग ने सभी एजेंसियों को धूल नियंत्रण के उपायों को और तेज़ करने के निर्देश दिए हैं। इसमें मिस्टिंग और स्प्रिंकलिंग बढ़ाना, मशीनी सफाई, कूड़ा उठाना, और निर्माण स्थलों पर सख़्त निगरानी शामिल है।

इस समय 1,200 से अधिक प्रवर्तन टीमें सक्रिय हैं- जिनमें 443 टीमें खुले में कचरा जलाने के खिलाफ, 378 टीमें धूल नियंत्रण के लिए और 578 टीमें वाहन प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम कर रही हैं। ये टीमें वार्ड और औद्योगिक इलाकों में दिन-रात गश्त कर रही हैं ताकि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को रोका जा सके।

सिरसा ने बताया कि “हमने 390 एंटी-स्मॉग गन, 280 वाटर स्प्रिंकलर और 76 मैकेनाइज्ड स्वीपर लगाए हैं। वाहनों के उत्सर्जन की नियमित जांच की जा रही है। सभी एजेंसियां मिलकर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि सर्दियों में भी यह सुधार जारी रहे।”

उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान केवल प्रवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद लंबे समय तक साफ़ इंफ्रास्ट्रक्चर और जागरूकता के ज़रिए स्थायी सुधार लाना है।

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