बीएचयू हिन्दी विभाग में ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर नियमों के अनुसार हो निर्णय: विद्यार्थी परिषद

— विश्वविद्यालय प्रशासन परिसर में अराजक तत्वों पर लगाए रोक

वाराणसी, 20 अप्रैल (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) इकाई ने विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में शोध प्रवेश प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और नियमबद्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। परिषद ने विशेष रूप से ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आरक्षण को लेकर भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

परिषद के काशी प्रांत मंत्री अभय प्रताप सिंह एवं बीएचयू इकाई अध्यक्ष प्रशांत राय के अनुसार हिन्दी विभाग में शोध प्रवेश से संबंधित प्रक्रिया पर दो अभ्यर्थियों ने ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र की वैधता और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर आपत्ति जताई है, जो वर्तमान में विश्वविद्यालय की यूएसीबी समिति के समक्ष विचाराधीन है।

परिषद का आरोप है कि इस प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कुछ राजनीतिक दलों और असामाजिक तत्वों द्वारा सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। परिषद के बीएचयू इकाई मंत्री भास्करादित्य त्रिपाठी को जानबूझकर निशाना बनाते हुए सोशल मीडिया पर उनके विरुद्ध दुष्प्रचार किया जा रहा है, जबकि परिषद का मानना है कि यह पूरा मामला विभागीय लापरवाही और प्रशासनिक चूक का परिणाम है।

परिषद ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय परिसर को शिक्षा और शोध के केंद्र के रूप में संरक्षित रखा जाना चाहिए। यह किसी भी राजनीतिक या विभाजनकारी गतिविधि के लिए मंच नहीं बनना चाहिए। हिन्दी विभाग में हुई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की मांग भी परिषद ने उठाई है।

एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि परिसर में असामाजिक एवं शिक्षा विरोधी तत्वों की गतिविधियों पर शीघ्र रोक लगाई जाए, ताकि बीएचयू का शैक्षणिक वातावरण सुरक्षित, र्विघ्न रूप से संचालित रह सके। अभय प्रताप सिंह ने कहा कि कुछ छात्र संगठन, जो राजनीतिक दलों से जुड़े हुए हैं, प्रवेश प्रक्रिया में अनियमितताओं का बहाना बनाकर विश्वविद्यालय के वातावरण को दूषित करने का प्रयास कर रहे हैं है। ऐसे तत्वों के प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाने की जरूरत है।

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