प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न राज्यों से आए कारीगरों द्वारा निर्मित हथकरघा एवं हस्तनिर्मित वस्त्र, लकड़ी एवं मिट्टी कला, धातु शिल्प, प्राकृतिक रंगों के उत्पाद, पारंपरिक आभूषण और जनजातीय कलाओं का अवलोकन किया। सदस्यों ने इसे “जीवंत सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत प्रदर्शन” बताया और कहा कि यह पहल न केवल कला को संरक्षित करती है, बल्कि शिक्षा और कौशल विकास के लिए भी नए रास्ते खोलती है।

क्राफ्ट रूट्स की पृष्ठभूमि

‘क्राफ्ट रूट्स’ एक सामाजिक एवं सांस्कृतिक आंदोलन है, जिसकी परिकल्पना राज्यपाल महोदया की दूरदर्शी सोच से प्रेरित है। गुजरात से प्रारंभ होकर यह पहल अब उत्तर प्रदेश में भी सफलतापूर्वक कार्य कर रही है। यह संस्था लुप्त होती पारंपरिक कलाओं को पुनर्जीवित करती है, कारीगरों को डिज़ाइन, ब्रांडिंग और वैश्विक बाज़ार से जोड़ती है, तथा हज़ारों ग्रामीण एवं महिला कारीगरों को आर्थिक आत्म निर्भरता प्रदान करती है। यह “वाेकल फाॅर लाेकल” और “आत्मनिर्भर भारत” की भावना को जमीनी स्तर पर साकार कर रही है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा, “‘क्राफ्ट रूट्स’ केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि परंपरा, नवाचार, स्वदेशी गौरव और महिला सशक्तिकरण का जीवंत आंदोलन है। राज्यपाल द्वारा आरंभ की गई यह पहल उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत है। डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय ऐसे मॉडलों को कौशल आधारित शिक्षा, उद्यमिता, सांस्कृतिक अध्ययन और सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।”

इस अध्ययन भ्रमण में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. अनुभूति दुबे, निदेशक महिला प्रकोष्ठ प्रो. दिव्या रानी सिंह, नोडल मिशन शक्ति प्रो. विनीता पाठक, कुलसचिव धीरेन्द्र श्रीवास्तव, वित्त अधिकारी श्री जय मंगल राव, श्री जय गोविंद सिंह, छात्रावास वार्डन डॉ. मीतू सिंह, डॉ मनीष पांडेय तथा विभिन्न संकायों के अन्य प्राध्यापक और अधिकारी सम्मिलित थे।

विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप ‘क्राफ्ट रूट्स’ मॉडल को कौशल और रोजगारोन्मुख शिक्षा, लोककला एवं सांस्कृतिक संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, स्टार्टअप और सामाजिक नवाचार जैसे क्षेत्रों से जोड़ने की दिशा में कार्य करेगा। इसके तहत इंटर्नशिप, प्रशिक्षण कार्यक्रम और संभावित एमओयू (MoU) के माध्यम से विद्यार्थियों को इन पहलों से प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।

यह भ्रमण विश्वविद्यालय के लिए न केवल एक सांस्कृतिक अनुभव रहा, बल्कि उच्च शिक्षा में नवाचार, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और सामाजिक सहभागिता की दिशा में एक प्रेरक कदम भी सिद्ध हुआ।

By editor

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