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​शेखावत ने कहा, “भारत हमेशा से मानता रहा है कि सांस्कृतिक विरासत सिर्फ़ स्मारकों, अभिलेखागारों या संग्रहालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक जीवंत अमूर्त धरोहर है जो हमारे दैनिक जीवन, परंपरा और कलाओं में गहराई से निहित है। हम इन जीवंत परंपराओं को बचाकर रखें, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ न केवल भौतिक संपदा, बल्कि दुनिया की इस पारंपरिक बुद्धिमत्ता को भी विरासत में पा सकें।”

मंत्री ने मीडिया को बताया कि आने वाले सात दिनों तक दुनिया भर के प्रतिनिधिमंडल विश्व की धरोहर के लिए नामित सभी आवेदनों पर विचार करेंगे और अमूर्त धरोहर के संरक्षण की भावी नीतियों पर चर्चा होगी। शेखावत ने बताया कि इस वर्ष दीपावली को अमूर्त विरासत के रूप में नामित करने के लिए भारत ने आवेदन दिया है, जिस पर अब समिति फैसला लेगी।

विदेश मंत्री डॉ एस. जयशंकर ने यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति (आईजीसी) की 20वीं अंतरराष्ट्रीय बैठक के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत एक संस्थापक सदस्य के रूप में वैश्विक शांति और समझ को बढ़ावा देने में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा, “इस विरासत का पोषण करें और इसे भविष्य की पीढ़ियों को सौंप दें।”

इस अवसर पर यूनेस्को के महानिदेशक डॉ. खालिद अल-एनानी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित दुनिया के विभिन्न देशों से प्रतिनिधिमंडल शामिल थे। यह बैठक अगले सात दिनों तक चलेगी, जिसमें दुनिया भर की अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

By editor

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