क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम के अनुसार आरोपित के खिलाफ बवाना थाने में चोरी, सेंधमारी और अवैध हथियार रखने के कई मामले दर्ज थे। अदालत से जारी गैर-जमानती वारंट से बचने के लिए उसने एमसीडी का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया और अदालत में यह दिखा दिया कि उसकी मौत 24 अगस्त 2021 को हो चुकी है। इसके बाद उसके खिलाफ चल रही कार्यवाही बंद हो गई । हालांकि, जब क्राइम ब्रांच की यूनिट ने पुराने मामलों की जांच दोबारा शुरू की तो डिजिटल रिकॉर्ड और स्थानीय पड़ताल में पता चला कि आरोपित जीवित है और गोरखपुर में छिपा हुआ है।

पुलिस उपायुक्त ने बताया कि क्राइम ब्रांच ने आरोपित की पहचान के लिए कुंडली ऐप और “फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम” से पुष्टि की। जिसमें उसकी मौजूदा तस्वीरें पुराने पुलिस रिकॉर्ड से मिल गईं।

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