क्राइम ब्रांच के डीसीपी विक्रम सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया है कि आरोपित ने शुरुआत टेली कॉलर के रूप में बीमा बेचने से की थी। इसके बाद उसने निवेश योजनाओं के नाम पर लोगों से पैसे ठगने का सिलसिला शुरू किया। उसने अपनी एक कंपनी भी बनाई थी। इसके जरिए वह लोगों को जाल में फंसाकर उनसे मोटी रकम ऐंठता था। द्वारका इलाके में एक महिला को निवेश के नाम पर लाखों का चूना लगाने के बाद फरार हो गया था।

इस संबंध में क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि आरोपित गोवा में नकली पहचान पर रह रहा है। सूचना को पुख्ता कर इंस्पेक्टर अक्षय गहलौत के नेतृत्व में टीम गोवा पहुंची और लगातार दो दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया। 19 अगस्त को आरोपित को उत्तर गोवा के पोर्वोरिम इलाके से गिरफ्तार किया गया। यहां वह अनिल जायसवाल नाम से रह रहा था, ताकि पुलिस की गिरफ्त से बच सके।

पुलिस के अनुसार, आरोपित के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, तेलंगाना, महाराष्ट्र, उप्र और चंडीगढ़ सहित कई राज्यों में ठगी के मामले दर्ज हैं। दिल्ली में उसके खिलाफ द्वारका नॉर्थ और पश्चिम विहार थाने में मुकदमा दर्ज हैं। वर्ष 2016 में पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में जमानत मिलने पर वह दोबारा फरार हो गया।

डीसीपी ने बताया कि आरोपित पिछले 10 साल से गिरफ्तारी से बचने के लिए जगह-जगह ठिकाना बदल रहा था। कोर्ट ने 2023 में उसे भगोड़ा घोषित किया था। आरोपित से पूछताछ की जा रही है और जिन राज्यों में उसके खिलाफ केस दर्ज हैं, वहां की पुलिस को भी सूचना दी जा रही है।

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