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मुख्यमंत्री ने बुधवार को जानकारी दी कि वह स्वयं उनकी सरकार के मंत्री एवं विभिन्न विभाग राजधानी के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। इसके लिए फील्ड में तो कार्य हो ही रहा है। इसके साथ ही विशेष बैठकें आयोजित कर प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को गंभीरता से तलाशा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में पीयूसी जांच तेज की जा रही है, प्रदूषित औद्योगिक इकाइयों को बंद करवाया जा रहा है, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने के साथ-साथ धूल को नियंत्रित करने के लिए लगातार कार्य चल रहे हैं। अलाव एवं कोयला-लकड़ी जलाने की घटनाएं भी अब शासन द्वारा नियंत्रित कर ली गई हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदूषण के प्रमुख कारकों में वाहनों से निकला उत्सर्जन एक प्रमुख कारण है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) व अन्य सरकारी और शोध-आधारित स्रोतों का कहना है कि वाहनों का उत्सर्जन कम कर लिया जाए तो प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषित वाहनों के खिलाफ तो कार्रवाई की ही जा रही है, साथ ही सड़कों से यातायात जाम को रोकने के लिए भी सरकार उपाय कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हमारी सरकार ने अस्थायी तौर पर ट्रैफिक पुलिस को डीटीसी के सरप्लस 600 ड्राइवर उपलब्ध कराए हैं, जो ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर सड़कों पर यातायात संचालन कर रहे हैं, साथ ही जाम की स्थिति को सामान्य बनाने में सहयोग कर रहे हैं। को सुचारू कर रहे हैं। इसके अलावा राजधानी के 500 पेट्रोल पंपों पर भी तीन पारियों में 24 घंटे दो-दो ड्राइवर (कुल 3,000) वहां पीयूसी चेक कर रहे हैं और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के ईंधन लेने से रोक रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इन्हीं स्टाफ की सजगता से पीयूसी की जांच में लापरवाही बरतने वाले 27 केंदों का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री के अनुसार उन्हें सूचना मिली है कि ऊंची इमारतो पर लगने वाली एंटी स्मॉग गन इमारतों के लिए परेशानी का कारण तो बन रही रही है, साथ ही प्रदूषण को नियंत्रित करने में वह बेहद प्रभावी नहीं है। इस गन का वजन बहुत अधिक होता है और यह सिर्फ एक ही दिशा में पानी का छिड़काव करती है। ये बहुत अधिक पानी का उपयोग भी करती है। राजधानी के बड़े व्यावसायिक परिसरों, मॉल, होटल और कार्यालय भवनों (जी+5 और उससे ऊपर) में 148 एंटी-स्मॉग गन कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हम नियम बदलने जा रहे हैं। अब शीघ्र ही ऊंची इमारतो पर इन गन्स के बजाय मिस्ट स्प्रे सिस्टम स्थापित करने की अनुमति दी जा रही है। यह नया सिस्टम राजधानी के कई क्षेत्रों में प्रभावी रूप से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम सभी दिशाओं में पानी का स्प्रे करता है, इसे इमारत पर एक के बजाय अधिक संख्या में लगाया जा सकता है, इसका वजन बहुत कम है और पानी की खपत भी कम होती है। यह पर्यावरण और आसपास के पेड़-पौधों के लिए भी लाभकारी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि एक अन्य दीर्घकालीन उपाय के अंतर्गत दिल्ली सरकार राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता जांचने के लिए निगरानी स्टेशनों की संख्या में भी बढ़ोतरी करने जा रही है ताकि इनके आधार पर प्रदूषण नियंत्रण के उपाय किए जा सकें। राजधानी में फिलहाल 40 स्थलों पर सतत वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन कार्यरत हैं, इनमें डीपीसीसी के 24, आईआईटीएम के 7, सीपीसीबी के 6 और एक केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय का शामिल है।

दिल्ली सरकार वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए सीएक्यूएम (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) के निर्देशानुसार छह और नए स्थानों पर स्टेशन स्थापित करने जा रही है। यह स्टेशन इग्नू, जेएनयू, इसरो अर्थ सेंटर, कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स सेंटर, एनएसयूटी (पश्चिमी परिसर) में स्थापित किए जाएंगे।

By editor

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