मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद जानकारी दी कि वैसे तो आयुष्मान आरोग्य मंदिर के निर्माण के लिए 100 गज जमीन ही काफी है, लेकिन उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इससे भी बड़े साइज की सरकारी जमीनों को चिन्हित करें और वहां इनका निर्माण करें। उन्होंने कहा कि बड़े आकार के आरोग्य मंदिरों में बड़े हॉल आदि बनाए जाएं ताकि इमरजेंसी के हालात वहां बेड आदि की व्यवस्था की जा सके। उन्होंने कहा कि बड़े आकार के बनने वाले आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पार्किंग आदि की व्यवस्था भी की जा सके। हमारी सरकार पुराने प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में यह आरोग्य मंदिर खोल ही रही है, साथ ही इन केंद्रों के लिए बड़े स्तर पर नई इमारतें भी बनाई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जिस तेज गति से आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का निर्माण चल रहा है, उसके आधार पर हमारी सरकार ने हर माह लगभग 100 आरोग्य मंदिर खोलने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार के विभिन्न विभाग इन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के लिए साथ-साथ मेडिकल व नॉन मेडिकल उपकरणों व अन्य सामान की भी खरीदारी कर रहे हैं ताकि इनके उद्धाटन के बाद किसी भी प्रकार की अड़चन पैदा न हो। संबंधित स्टाफ की नियुक्ति को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने राजधानी में इन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के परिचालन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद दिया और बताया कि दिल्ली सरकार को इस मद में केंद्र सरकार से 2400 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हो चुकी है, इसलिए इन आयुष्मान आरोग्य मंदिर के निर्माण व परिचालन मे किसी प्रकार की समस्या नहीं आने वाली। उन्होंने कहा कि इन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था का इतना आधुनिक सेटअप रखा जा रहा है कि लोगों को सामान्य व मौसमी बीमारियों के लिए अस्पतालों में न जाना पड़े।

मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि दिल्ली मे संचालित हो रहे 67 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और नए आरोग्य मंदिरों में 12 प्रकार की समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनमें मानसिक स्वास्थ्य और बुजुर्गों के लिए उपशामक देखभाल भी शामिल हैं। इसके साथ ही अब इन मंदिरों में इन-हाउस लैब टेस्ट भी किए जाएंगे। इन आरोग्य सेवा केंद्रों में प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं इस प्रकार हैं, जैसे गर्भावस्था एवं प्रसव सेवाएं, नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, किशोर स्वास्थ्य देखभाल, परिवार नियोजन, सामान्य संक्रामक रोगों की रोकथाम और उपचार, असंक्रामक रोगों की पहचान और प्रबंधन, नेत्र एवं ईएनटी समस्याओं की देखभाल, मौखिक स्वास्थ्य सेवाएं, वृद्धजनों की देखभाल, जीवन के अंतिम चरण की देखभाल, आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की स्क्रीनिंग और प्राथमिक उपचार।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इन केंद्रों पर एक डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, सहायक नर्स/दाई, प्रयोगशाला तकनीशियन, टीबी प्रबंधन विशेषज्ञ, डाटा ऑपरेटर और मल्टी-पर्पज सहायक कर्मचारी की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए है। इन केंद्रों में आवश्यक फर्नीचर के साथ भरपूर दवाइयों का भंडारण, आधुनिक प्रयोगशालाएं और साफ-सुथरे शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है।

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