नई दिल्ली, 31 जुलाई । राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित बीएसएल ग्लोबल आउटरीच समिट-2025 के दूसरे दिन गुरुवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाग लिया। इस दो दिवसीय वैश्विक आयोजन में टेक्सटाइल और परिधान उद्योग से जुड़े देश-विदेश के नामचीन उद्यमी, निर्माता, निर्यातक और खरीदार जुटे। मुख्यमंत्री ने समिट में शामिल होकर कई उद्योगपतियों को बीएसएल एक्सीलेंस अवॉर्ड्स-2025 से सम्मानित किया और उद्योग जगत के लोगों के साथ राउंड टेबल चर्चा व वन-टू-वन संवाद भी किया।

इस मौके पर डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल और राज्य सरकार की नीतियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और खासकर रोजगारपरक उद्योगों के लिए सरकार कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अगर कोई महिला रोजगारपरक उद्योग लगाती है तो सरकार उसके लिए प्रति कर्मचारी 6 हजार रुपये प्रतिमाह तक की सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में कपास का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और हमने कच्चे माल से लेकर धागा और कपड़े बनाने तक की प्रक्रिया को सुदृढ़ किया है। हम निर्माता से लेकर खरीदार तक सभी हितधारकों को एक ही मंच पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। इस प्रकार के आयोजन वैश्विक स्तर पर नेटवर्किंग और निवेश को गति देते हैं।

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए अनेक बाधक कानूनों को खत्म किया है। हमने 42 पुराने कानूनों को समाप्त किया है जो व्यापार को अनावश्यक रूप से रोकते थे। पहले एक उद्योग लगाने के लिए 29 प्रकार की अनुमतियां लेनी होती थीं, जिसे घटाकर अब सिर्फ 10 कर दिया गया है। इससे उद्यमियों का समय बचेगा और उद्योग जल्दी स्थापित होंगे। उन्होंने कहा कि पहले यदि कोई उद्योग लगने से पहले ही बिजली का कनेक्शन लेता था तो उसे पूरी क्षमता के अनुसार बिल देना होता था, लेकिन अब हमने यह नियम बदल दिया है। अब उद्योग की वास्तविक क्षमता के अनुसार बिजली का बिल तभी लिया जाएगा जब वह पूरी तरह से चालू हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योगों के लिए बिजली, पानी और जमीन की लागत लगभग नगण्य कर दी है, जिससे निवेशकों को लाभ मिलेगा। अगर कोई उद्योग मध्यप्रदेश में लगता है तो सरकार अगले 10 वर्षों तक उसके प्रत्येक श्रमिक को 6 हजार रुपये प्रतिमाह देगी। इन सभी छूटों और प्रोत्साहनों को मिलाकर देखा जाए तो यह 200 प्रतिशत तक का प्रोत्साहन है। मुख्यमंत्री ने समिट के आयोजकों और उपस्थित वैश्विक प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत के विकास में इस प्रकार के आयोजनों और टेक्सटाइल उद्योग की बड़ी भूमिका है। नवाचार और नीति सुधार के माध्यम से हम देश को आत्मनिर्भर और उद्योग प्रधान बना सकते हैं।

गौरतलब है कि बीएसएल ग्लोबल आउटरीच समिट-2025 टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर पर केंद्रित दो दिवसीय वैश्विक आयोजन है, जिसका उद्देश्य भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच सहयोग और निवेश को बढ़ावा देना है। समिट में सस्टेनेबल फैशन, पारंपरिक शिल्प और टेक्सटाइल नवाचार जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें बिहार और मध्यप्रदेश को वैश्विक टेक्सटाइल केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया।

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