नई दिल्ली, 11 फ़रवरी । दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को त्यागराज स्टेडियम में निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए आर्थिक सहायता कार्यक्रम और गांवों से जुड़ी कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने निर्माण श्रमिकों के 15,706 बच्चों के लिए 12.40 करोड़ रुपये से अधिक की पढ़ाई से जुड़ी सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में स्थानांतरित की। साथ ही दिल्ली के दो गांवों में नए पंचायत घरों का उद्घाटन किया। इसके अलावा 37 गांवों में 59 नई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की गई, जिनकी कुल अनुमानित लागत 134 करोड़ रुपये है।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित श्रमिकों को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली केवल इमारतों और सड़कों से नहीं बनती बल्कि श्रमिकों के श्रम से बनती है। जो हाथ दिल्ली को गढ़ते हैं, उनकी सुरक्षा, सम्मान और भविष्य की जिम्मेदारी हमारी सरकार की प्राथमिकता है।
कार्यक्रम में दिल्ली के श्रम एवं रोजगार मंत्री कपिल मिश्रा, दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड के अध्यक्ष राजकुमार चौहान, श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत पर काम कर रही है, जिसका अर्थ है समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को सशक्त बनाना। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को साझा करते हुए कहा कि सत्ता हमारे लिए सुख भोगने का साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (डीबीओसीडब्ल्यूडब्ल्यूबी) पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए शिक्षा सहायता योजना चला रहा है, ताकि आर्थिक तंगी उनकी पढ़ाई में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को 500 रुपये प्रतिमाह, नौवीं और दसवीं के छात्रों को 700 रुपये प्रतिमाह, ग्यारहवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को 1,000 रुपये प्रतिमाह और स्नातक स्तर पर पढ़ने वाले छात्रों को 3,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाती है। वहीं आईटीआई, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग, मेडिकल और एमबीए जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों में अध्ययन करने वाले छात्रों को 10,000 रुपये प्रतिमाह तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड का पुनर्गठन कर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों को नई गति प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत 776 परियोजनाओं के प्रस्ताव दिए गए, जिनकी अनुमानित लागत 1715.05 करोड़ रुपये है। इनमें से 705 परियोजनाओं को 1,556 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई। साथ ही 702 परियोजनाओं के लिए प्रथम किश्त के रूप में 157 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से सड़क, तालाब, पार्क, श्मशान घाट, चौपाल, पुस्तकालय और सामुदायिक भवनों का विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में दिल्ली के गांवों की उपेक्षा हुई, जिसे बदलने के लिए सरकार ने पहले ही बजट में 1000 करोड़ का प्रावधान किया था। आज 705 परियोजनाओं के माध्यम से गांवों में सड़कों, चौपालों, बारात घरों, ओपन जिम और पार्कों का निर्माण सुनिश्चित किया जा रहा है।
इस अवसर पर श्रम एवं रोजगार मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि पिछले वर्षों में श्रमिकों से जुड़े विभागों के कार्य ठप पड़े थे। लेकिन अब तेजी से सुधार किया जा रहा है। दिल्ली के सभी लेबर कोर्ट को ई-कोर्ट में परिवर्तित किया जा रहा है। निर्माण श्रमिकों के पंजीकरण की प्रक्रिया तेज की गई है, स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं, आधुनिक टूल और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महिला श्रमिकों को 24 घंटे किसी भी शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा, दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से रुके विकास कार्य अब व्यापक स्तर पर शुरू किए जा रहे हैं, जिनमें से कई का उद्घाटन और शिलान्यास आज किया गया।
