लखनऊ। प्रदेश सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए जमीन, मकान और भूखंड की रजिस्ट्री प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बना दिया है। अब लोग खुद ही अपने संपत्ति का सर्किल रेट निकाल सकेंगे। इसके लिए सरकार ने सर्किल रेट निर्धारण के पुराने जटिल नियमों में व्यापक सुधार किया है।नई व्यवस्था के तहत अब पूरे प्रदेश में सर्किल रेट केवल तीन आधारों — नगरीय, अर्ध-नगरीय और ग्रामीण — पर तय होंगे। पहले की तरह “विकसित”, “विकासशील” और “अविकसित” जैसी श्रेणियां अब समाप्त कर दी गई हैं। साथ ही, सर्किल रेट निर्धारण की श्रेणियों को 45 से घटाकर केवल 15 कर दिया गया है।

स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने मंगलवार को विधानभवन में बताया कि अब प्रदेश के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में एक समान दर सूची लागू की जाएगी। इससे संपत्ति मूल्यांकन की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और विवाद रहित होगी। लोग स्वयं अपनी संपत्ति का मूल्य निकाल सकेंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त होगी।महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने बताया कि अब दरें पहले की तरह भ्रमित नहीं होंगी। मूल्यांकन में अब केवल तीन मानक लागू होंगे और पूरे प्रदेश में एकरूप नीति से रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।नई प्रणाली के तहत—अब सर्किल रेट का प्रारूप सभी जिलों में एक समान और सरल भाषा में होगा।जनता स्वयं अपनी संपत्ति का मूल्यांकन कर सकेगी, किसी की सहायता की आवश्यकता नहीं होगी।निर्मित, अर्धनिर्मित और अनिर्मित भूखंडों के लिए अलग-अलग दरें समाप्त की गई हैं।

भूखंड का मूल्य सड़क से जुड़ाव और लोकेशन के आधार पर तय होगा।

1000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली संपत्तियों पर क्षेत्रफल आधारित रियायत मिलेगी।

कृषि भूमि के मूल्यांकन में पेड़ों की संख्या और प्रकार को शामिल किया गया है।

भवन की उम्र के आधार पर 20 से 50 प्रतिशत तक मूल्यह्रास की सुविधा दी गई है।

होटल, पेट्रोल पंप, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, जिम आदि के लिए अलग दरें निर्धारित की गई हैं।

एक ही परिसर में स्थित अलग-अलग दुकानों या फ्लोर के लिए समान कर रियायत मिलेगी।

पूरे प्रदेश में पेड़ों के मूल्यांकन के लिए एक समान नियम लागू किया गया है।

नई व्यवस्था के तहत अब औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों के लिए अलग-अलग दरें खत्म कर एकीकृत मूल्य निर्धारण प्रणाली अपनाई गई है। साथ ही, भवन की उम्र और स्थिति को भी मूल्यांकन का अहम आधार बनाया गया है।सरकार का कहना है कि इस नई दर नीति से न केवल रजिस्ट्री की प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि जनता खुद अपने संपत्ति का मूल्यांकन पारदर्शी तरीके से कर सकेगी, जिससे अनावश्यक विवाद और भ्रष्टाचार की संभावनाएं समाप्त होंगी।

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