नई दिल्ली। भारत की न्यायपालिका ने रविवार को एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब हरियाणा के हिसार जिले के गांव पेटवाड़ से आने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें पद की शपथ दिलाई।शपथ ग्रहण के तुरंत बाद जस्टिस सूर्यकांत ने मंच से उतरकर अपनी बहन और बड़े भाई के पांव छूकर आशीर्वाद लिया—यह दृश्य पूरे समारोह का सबसे भावुक पल बन गया। कार्यक्रम में उनका परिवार भी शामिल रहा।
इस बार समारोह कई मायनों में खास रहा। भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार किसी सीजेआई के शपथ ग्रहण में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहा। भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश अपने-अपने परिवारों के साथ पहुंचे।पूर्व सीजेआई बी.आर. गवई ने भी एक मिसाल कायम की। उन्होंने शपथ के बाद अपनी आधिकारिक गाड़ी राष्ट्रपति भवन में ही अपने उत्तराधिकारी जस्टिस सूर्यकांत के लिए छोड़ दी। जस्टिस सूर्यकांत रविवार को सेवानिवृत्त हुए जस्टिस गवई की जगह संभालेंगे।समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान 1000 से अधिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं। वे कई महत्वपूर्ण संवैधानिक बेंचों का भी हिस्सा रहे।
उनके प्रमुख निर्णयों में शामिल हैं—
अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को 2023 में बरकरार रखना
राजद्रोह कानून पर रोक से जुड़ा ऐतिहासिक आदेश
बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण
1967 के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी संबंधी फैसले को निरस्त करना
बिहार में एसआईआर मामले की सुनवाई
2017 में हरियाणा पंजाब हाईकोर्ट में गुरमीत राम रहीम मामले के बाद डेरा सच्चा सौदा की सफाई का आदेशसंघर्षों से निकलकर शीर्ष तक10 फरवरी 1962 को जन्मे जस्टिस सूर्यकांत का बचपन साधारण परिवार में बीता। पिता शिक्षक थे, और परिवार चलाने में हाथ बँटाने के लिए सूर्यकांत खेतों में काम भी करते थे। दसवीं बोर्ड परीक्षा देने के लिए वे पहली बार गांव से बाहर हांसी कस्बे तक गए थे।उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया और आगे चलकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी बने।आज वे हरियाणा से आने वाले पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला है—जो राज्य के लिए बड़ा गौरव है।
