Category: उत्तर प्रदेश

NEET के दबाव में पिता को गोलियों से भूना, आरी से लाश के टुकड़े कर ड्रम में भरे; रूह कंपा देगी ये हैवानियत!

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना इलाके में एक ऐसी वारदात हुई है जिसने रिश्तों को तार-तार कर दिया है। जहां एक 21 वर्षीय युवक ने अपने ही पिता…

घूसखोर लेखपाल अरेस्ट; मिठाई की दुकान पर ले रहा था 10 हजार रुपये रिश्वत, विजिलेंस टीम ने रंगेहाथ दबोचा

कौशांबी जिले में विजिलेंस टीम ने कार्रवाई करते हुए एक और रिश्वतखोर को गिरफ्तार कर लिया है। शिकायत मिलने पर टीम ने जांच की और पश्चिम शरीरा थाना क्षेत्र में…

शादी की खुशियां मातम में बदलीं, कफ सिरप समझकर 5 साल की मासूम ने पिया तेजाब; तड़प-तड़प कर हो गई मौत

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने हर माता-पिता का दिल दहला दिया है। यहां एक शादी समारोह में अपनी मां के साथ ननिहाल गई…

UP सियासत में मायावती का बड़ा धमाका: अखिलेश को दिखाया ठेंगा, बोलीं- ‘गठबंधन BSP को खत्म करने की गहरी साजिश’

उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच गठबंधन की चर्चाओं पर मायावती ने पूरी तरह विराम लगा दिया है। बसपा सुप्रीमो ने…

‘UP बनेगा AI, डीप टेक और क्वांटम कंप्यूटिंग का नया हब’, CM Yogi बोले- IBM AI GovTech सेंटर के लिए medtech पर IIT कानपुर के साथ मिलकर हो रहा काम

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि यह राज्य ‘डीप टेक’, एआई व क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में अग्रणी बनने की दिशा में तेजी से कार्य…

बोर्ड परीक्षा के दौरान कक्ष में अचानक गिरे शिक्षक… अस्पताल पहुंचने से पहले थम गई सांस

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में बोर्ड परीक्षा के दौरान एक दर्दनाक घटना सामने आई है। 10वीं की अंग्रेजी परीक्षा की पहली पाली के समय ड्यूटी पर तैनात एक शिक्षक की…

https://mudgaltimeslive.com/एक-ही-परिवार-के-3-लोगों-की-मौ/

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से नारी शक्ति का एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर मनचलों की रूह कांप जाएगी। गंगीरी थाना क्षेत्र में एक महिला ने बीच…

एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत, तेज रफ्तार कार पेड़ से टकराई, गाड़ी के उड़े परखच्चे; तस्वीरें देख कांप जाएगा कलेजा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के किला थाना क्षेत्र के स्वाले नगर में दिल्ली-बरेली रोड पर बीती देर रात एक भीषण सड़क हादसे में शादी समारोह से लौट रहे तीन…

प्रयागराज में धर्मयुद्ध या साजिश? शंकराचार्य के खिलाफ यौन शोषण केस की जांच शुरू, क्या सलाखों के पीछे जाएंगे अविमुक्तेश्वरानंद

धर्मनगरी प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद पर लगे यौन शोषण के आरोपों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सोमवार से प्रयागराज पुलिस की…

citizens-troubled-by-bullying-of-transgender

किन्नरों की दबंगई से परेशान नागरिकों ने पुलिस से लगाई सुरक्षा की गुहार

पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि कुछ किन्नर समुदाय के लोग क्षेत्र में घर-घर जाकर नवजात शिशु के जन्म अथवा विवाह जैसे पारिवारिक अवसरों पर ज़बरदस्ती…

You missed

यह चुनाव केवल इस बात तक सीमित नहीं रह गया है कि राज्य सचिवालय नबान्न तक कौन पहुंचेगा, बल्कि यह इस बात पर जनमत संग्रह बन गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 15 वर्षों के शासन के बाद भी बंगाल की केंद्रीय राजनीतिक शक्ति बनी रहती हैं या नहीं, और क्या लगातार चौथी जीत उन्हें 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्षी चेहरा स्थापित कर सकती है, या फिर भाजपा को राज्य में सत्ता का रास्ता मिल गया। दो चरणों में हुए विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 92.47 प्रतिशत दर्ज किया गया। पहले चरण में 93.13 प्रतिशत और दूसरे में 91.66 प्रतिशत मतदान हुआ। यह स्वतंत्रता के बाद का अब तक का सर्वाधिक मतदान है। इसने 2011 के 84 प्रतिशत मतदान के रिकॉर्ड को भी पार कर लिया, जब बनर्जी पहली बार सत्ता में आई थीं और 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन का अंत हुआ था। बनर्जी के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन की निर्णायक लड़ाई माना जा रहा है। लगातार तीन कार्यकाल और डेढ़ दशक तक सत्ता में रहने के बाद वह न केवल सत्ता बरकरार रखने बल्कि अपने स्थापित राजनीतिक ढांचे की रक्षा के लिए भी संघर्ष कर रही हैं। तृणमूल कांग्रेस और बनर्जी के बीच अंतर लगभग समाप्त हो चुका है। 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा ने आक्रामक अभियान चलाया था, तब बनर्जी ने चोटिल होने के बावजूद व्हीलचेयर पर रहकर मुकाबला किया और जीतीं, जिससे उनका कद राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत विपक्षी नेता के रूप में बढ़ा। 2026 की लड़ाई अधिक कठिन मानी जा रही है। इस बार उन्हें सत्ता विरोधी लहर, भ्रष्टाचार के आरोप, भर्ती घोटालों और शासन संबंधी सवालों का सामना करना पड़ रहा है। तृणमूल के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, “यह चुनाव बंगाल की राजनीतिक पहचान की रक्षा को लेकर है। यदि दीदी फिर जीतती हैं, तो यह साबित होगा कि कल्याणकारी राजनीति और बंगाली अस्मिता सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को हरा सकती है।” दूसरी ओर, भाजपा के लिए बंगाल अब भी अधूरा राजनीतिक लक्ष्य बना हुआ है। पार्टी का मानना है कि वह राज्य में सत्ता हासिल कर अपने “अंतिम वैचारिक मोर्चे” को पार कर सकती है। पार्टी का वोट शेयर 2011 में लगभग चार प्रतिशत से बढ़कर 2019 में करीब 40 प्रतिशत तक पहुंचा और 2021 में उसने 77 सीटें जीतीं, जिससे वह तृणमूल की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बन गई। एक भाजपा नेता ने कहा, “हमारे लिए बंगाल अधूरा राजनीतिक मिशन है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर आज तक यह एक राजनीतिक यात्रा को पूरा करने का प्रश्न है।” चुनाव में सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर रहा। राज्यभर में लगभग 91 लाख नाम हटाए जाने से करीब 12 प्रतिशत मतदाता सूची से बाहर हो गए। तृणमूल ने इसे अल्पसंख्यकों, प्रवासियों, महिलाओं और गरीबों के मताधिकार को प्रभावित करने वाला कदम बताया, जबकि भाजपा ने इसे फर्जी नामों को हटाने की प्रक्रिया बताया। विश्लेषकों का मानना है कि एसआईआर ने चुनाव के गणित के साथ-साथ मनोविज्ञान को भी प्रभावित किया है। राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा कि चुनाव केवल संख्याओं से नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न मनोवैज्ञानिक प्रभाव से तय होते हैं। मतगणना चार मई को होगी, जब यह स्पष्ट हो जाएगा कि बनर्जी का लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक वर्चस्व बरकरार रहता है या भाजपा अंततः राज्य में सत्ता तक पहुंचने में सफल होती है।

Verified by MonsterInsights