प्रयागराज, 07 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोपी बैंक प्रबंधक व उनकी पत्नी के खिलाफ एसीजेएम गोरखपुर के समक्ष विचाराधीन आपराधिक केस कार्यवाही पर रोक लगा दी है और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी करते हुए विपक्षियों से जवाब मांगा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजवीर सिंह ने सूरज शुक्ल व अन्य की याचिका पर दिया है। मृतका भी एचडीएफसी बैक गोरखपुर में कर्मचारी थी। जिसने फांसी के फंदे पर लटक कर जान दे दी।

याची अधिवक्ता का कहना था कि यह आरोप निराधार है कि मृतक व याची बैंक प्रबंधक के अवैध संबंधों के चलते याची की पत्नी उसे परेशान करती थी। मृतका ने मृत्यु से पहले दिये बयान व मोबाइल चैटिंग में कहीं पर यह साक्ष्य नहीं आया है कि याची ने उसे खुदकुशी करने के लिए उकसाया है।

पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में मौत का करण सिर में चोट लगना बताया गया है। यह भी नहीं कहा जा सकता कि वध हुआ है।याची के खिलाफ कोई सबूत नहीं है जिससे कहा जा सके कि उनके उकसाने के कारण मृतका अपने घर में फांसी पर झूली। एफआईआर भी पिता ने लिखाया है,उसके पति ने नहीं।

कोर्ट ने शिकायतकर्ता को नोटिस जारी की है और राज्य सरकार सहित विपक्षी से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई 17 नवम्बर को होगी।

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