मुजफ्फरनगर। एक फोन कॉल और कुछ विश्वसनीय दिखने वाली डिजिटल दस्तावेज़,यही था उस जाल का आरम्भ जिसने एक रिटायर्ड इंजीनियर को बेबस कर दिया। डराकर, भ्रमित कर के और सिस्टम की भाषा बोलकर ठगों ने पीड़ित से लाखों रुपये एडवांस करवा लिए। आज उससे जुड़ा पूरा रैकेट थाना साइबर क्राइम की सूझबूझ से खुला और मुजफ्फरनगर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ा काम किया है।

एजेंसियों के नाम से डराते थे ठग:-

गिरोह की चालाकी का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि वे अपने शिकार को डराने के लिए ईडी, सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों का नाम लेकर दबाव बनाते थे। कॉल पर खुद को अधिकारी या एजेंसी से जुड़ा बताकर यह कहा जाता था कि अगर मांगी गई रकम तुरंत जमा नहीं की गई तो बड़े स्तर की जांच एजेंसियों से केस दर्ज हो जाएगा। इसी खौफ में अनेक लोग करोड़ो रुपये गंवा बैठे |

पढ़े लिखें नौजवानों ने बनाया गिरोह:-

गिरफ्तार आरोपियों में एक MBA पास युवक शामिल है और 12 वीं पास | दोनों बैंक खाते खरीदकर और नकदी निकालकर इस नेटवर्क को सक्रिय रूप से चला रहे थे। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार अभियुक्तों के पहचान निखिल गोयल पुत्र नरेश गोयल निवासी आनंद विहार, गंगानगर ऋषिकेश कोतवाली, जनपद देहरादून उत्तराखंड और हरप्रीत सिंह उर्फ हर्ष पुत्र चरनजीत सिंह मान, पावर हाउस चौक डोकरी घाटपारा थाना जद्दलपुर, जनपद बस्तर छत्तीसगढ़ के रूप में हुई है। निखिल MBA पास है और तार्किक व टेक्निकल पैंतरेबाज़ी में सक्रिय भूमिका निभाता आया। दोनों को मुखबिर की सूचना पर पुरकाजी बाइपास से पकड़कर हिरासत में लिया गया।

कंबोडिया से संचालित हो रहा था:-

नेटवर्क पुलिस जांच से सामने आया है कि इस गिरोह का ग्रुप लीडर राजू (निवासी भिलाई, छत्तीसगढ़) है, जो वर्तमान में ऋषिकेश में ठिकाना बताता है और कंबोडिया में बैठे सहयोगियों के साथ मिलकर नेटवर्क को संचालित कर रहा था। गिरोह का काम सादगी में घातक था | वे छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश झारखंड आदि राज्यों के भोले-भाले लोगों को 50 हज़ार रूपये देकर बदले में उनके बैंक खाते, एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक और चेकबुक ले लेते और इन खातों का दुरुपयोग करते थे। डिजिटल फ्रॉड से आए पैसों को खातों में मंगवाया जाता और फिर साथी सदस्य एटीएम या चेक के जरिए नकद निकाल कर गिरोह का हिस्सा बनाते थे, उसी काम में निखिल व हरप्रीत कई बार एटीएम से निकासी करते नजर आए और पुलिस की निगरानी में आए।

एसएसपी मुजफ्फरनगर संजय कुमार वर्मा ने बताया कि इस गिरोह का सरगना राजू पुलिस की पकड़ से अभी बाहर है, लेकिन जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।शिकायतों की लंबी लिस्ट11 सितंबर को प्राप्त शिकायत के बाद थाना साइबर क्राइम ने तेज़ी से गिरोह के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। पीड़ितों में मुजफ्फरनगर निवासी रिटायर्ड इंजीनियर से 33,33,000 रुपये ठगी करने की घटना प्रमुख है। प्रारम्भिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि गिरोह के संबंधी खातों पर विभिन्न राज्यों से कुल मिलाकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ी दर्जनों शिकायतें पंजीकृत हैं; फिलहाल पुलिस को इन खातों से जुड़े लगभग 44 शिकायतों और करीब ₹46.55 करोड़ के घोटाले का संकेत मिला है।

गिरफ्तारी और सबूत:-

पुलिस ने जब दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया, उनके कब्जे से सिमकार्ड, दर्जनों बैंक पासबुक व एटीएम/डेबिट कार्ड, मोबाइल फोन, चेकबुक, नोटबुक, एक स्कूटी और नगद लगभग ₹99,500 जब्त किए—ये सब प्रमाण यह दर्शाते हैं कि मामला स्थानीय सहायक और विदेशी सहयोगियों का संगठित नेटवर्क था। पुलिस ने बताया कि गिरोह इलेक्ट्रॉनिक लेंस से बनाये गए नकली फॉर्म-डॉक्युमेंट और ब्रांडेड लोगो लगा कर झूठे संदेश/पीडीएफ भेजकर लोगों को भ्रमित करते थे।

पुलिस की कार्रवाई और अपील:-

एसएसपी मुजफ्फरनगर संजय कुमार वर्मा ने पुलिस लाइंस स्थित सभागार में प्रेस वार्ता कर कहा कि यह मामला पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी है। उन्होंने टीम की तारीफ करते हुए कार्रवाई करने वाली टीम के सदस्यों के लिए पुरस्कार राशि ₹25,000 की घोषणा की और आम जनता से अपील की कि किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी देने वाले व्यक्ति के सामने भय में आकर बैंक विवरण साझा न करें। किसी भी तरह की शंका या ठगी की घटना होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या नज़दीकी थाने से संपर्क करने की हिदायत उन्होंने दोहराई।

आगे की जाँच में बहुत कुछ आना बाक़ी:-

इस पूरे मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के नेटवर्क, उनके आंतरराज्यीय संपर्क तथा विदेश से जुड़े लिंक की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है। इस कार्यवाही को पुलिस अधीक्षक अपराध इंदु सिद्धार्थ के नेतृत्व में अंजाम दिया गया |

गिरफ्तारी टीम के सदस्य गिरफ्तारी व कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मी: प्रभारी निरीक्षक सुल्तान सिंह, उपनिरीक्षक गौरव चौहान, उपनिरीक्षक धर्मराज सिंह, उपनिरीक्षक जय शर्मा, अवधेश कुमार, सुनील कुमार, रोबिन कसाना, अंकुर शर्मा और राहुल कुमार।

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