कर्नाटक के हुबली से एक विवादित मामला सामने आया है, जिसमें भाजपा ने आरोप लगाया है कि उसकी महिला कार्यकर्ता को पुलिस हिरासत के दौरान शारीरिक रूप से परेशान किया गया और उनके कपड़े फाड़े गए। पार्टी का कहना है कि यह घटना तब हुई जब महिला ने गिरफ्तारी का विरोध किया और आपत्ति जताई। एक वायरल वीडियो में देखा गया कि महिला को पुरुष और महिला पुलिसकर्मी बस में घेरे हुए थे। भाजपा का दावा है कि हिरासत के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।

पुलिस का पक्ष

हुबली पुलिस कमिश्नर शशि कुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि महिला ने हिरासत के दौरान खुद कपड़े उतार दिए और पुलिसकर्मियों पर हमला किया। उन्होंने बताया कि चॉलुक्य नगर में सर्वेक्षण के लिए अधिकारियों का दौरा हुआ था, और स्थानीय लोगों के बीच कुछ असहमति के कारण विवाद हुआ। इस दौरान बहस, गाली-गलौज और शारीरिक टकराव भी हुआ।

कमिश्नर ने कहा, “इसके आधार पर तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे। 5 जनवरी को एक महिला को हिरासत में लिया गया। उसे एक स्थानीय द्वारा दर्ज की गई हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के दौरान महिला ने काफी विरोध किया और अपने परिचितों के साथ मिलकर पुलिस पर हमला किया। इस दौरान हमारे एक उप-निरीक्षक को काटने तक की कोशिश की गई, साथ ही तीन-चार हमारे स्टाफ के साथ भी दुर्व्यवहार हुआ और उन्हें अपने कर्तव्य निभाने से रोका गया।” उन्होंने यह भी कहा कि महिला हिरासत में जाते समय अपने कपड़े उतारने लगी थी, जिसे पुलिस की महिला स्टाफ और स्थानीय लोगों की मदद से उसे पहनाया गया।

महिला पर पहले से दर्ज मामले

कमिश्नर ने बताया कि महिला के खिलाफ कुल नौ मामले दर्ज हैं, जिनमें से पांच पिछले साल दर्ज हुए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस ने उसके साथ गलत व्यवहार नहीं किया। इस मामले ने हुबली में राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है और भाजपा तथा स्थानीय राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

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