इस साल BJP ने दिल्ली विधानसभा चुनाव जीता जो इसलिए भी अहम रहा क्योंकि यह जीत 27 साल बाद मिली थी। इस साल बिहार में फिर से नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA की सरकार बन गई और इस बार पहले से भी ज्यादा सीटों के साथ। BJP सबसे ज्यादा सीटें जीतकर राज्य में सबसे बड़ी पार्टी भी बनी। चुनावी जीत के लिहाज से साल 2025 BJP के लिए काफी अच्छा रहा। अब नया साल सामने है। सवाल है कि BJP और NDA के सामने इस साल में क्या है और क्या ये साल अलग तरह की चुनौतियां लेकर आएगा।
मिशन साउथ कैसा रहेगा
इस साल तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल , केरल, असम और पुडुचेरी में चुनाव होने हैं। ये चुनावी साल BJP के लिए ज्यादा अहम इसलिए है क्योंकि वह तमिलनाडु और केरल में अपनी जड़ें जमाने की काफी वक्त से कोशिश कर रही है। उत्तर भारत में तो पार्टी अपने पीक पर पहुंच चुकी है, लेकिन दक्षिण भारत क्रैक करना उसके लिए चुनौती है। हालांकि BJP ने केरल में अपनी मौजूदगी दर्ज करना शुरू कर दिया है, पर अब भी मिशन साउथ की सफलता के लिए उसे लंबी राह तय करनी है।
पश्चिम बंगाल से उसे पिछले चुनाव में भी बहुत उम्मीद थी, लेकिन वह पूरी नहीं हुई। इस बार उसके लिए यह नाक का भी सवाल है और साख का भी। यहां खुद गृह मंत्री अमित शाह ने कमान संभाली है। बांग्लादेश की उथलपुथल और घुसपैठियों के मुद्दे के बीच देखना होगा कि BJP पश्चिम बंगाल में कितना असर दिखाती है। असम में BJP की सरकार है और यहां उसके सामने सत्ता बचाने की चुनौती है। पश्चिम बंगाल की तरह ही यहां भी बांग्लादेश के हालात और घुसपैठिए ये दोनों ही बड़ा मुद्दा हैं।
इस साल BJP को एक और फ्रंट पर काम करना होगा। वह है सहयोगियों को एकजुट रखना। केंद्र में पीएम मोदी के नेतृत्व में NDA सरकार है और BJP के पास इस बार अपना बहुमत नहीं है। जाहिर है, ऐसे में उसकी आगे की राह उतनी आसान नहीं रहेगी। इन मुश्किलों के संकेत अभी से मिलने लगे हैं। मिसाल के तौर पर NDA में शामिल बिहार के ही कुछ छोटे दल राज्यसभा सीट की मांग को लेकर नाराजगी दिखा रहे हैं। हालांकि ये प्रेशर टैक्टिस ज्यादा है लेकिन फिर भी गठबंधन के साथियों को छिटकने न देना और NDA की एकजुटता बरकरार रखना BJP के लिए एक ऐसी चुनौती है जो बनी रहेगी।
बीजेपी ने दिए जनरेशनल शिफ्ट के संकेत
BJP ने इस साल के आखिर में 45 साल के नितिन नवीन को अपना राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर जनरेशनल शिफ्ट के संकेत तो दे ही दिए। अब नए साल में एक बड़ी चुनौती नई टीम बनाने की होगी। देखने वाली बात यह होगी कि क्या पुराने और बुजुर्ग नेता नितिन की टीम का हिस्सा बनेंगे या संगठन में नए और युवाओं को ज्यादा जगह दी जाएगी।
नए मुद्दों की तलाश
BJP विपक्ष से कहती रही कि मोदी नहीं तो कौन? इस सवाल का जवाब BJP को भी तलाशना है। भले ही अभी नहीं लेकिन आने वाले वक्त के लिए उसे इसका जवाब ढूंढकर रखना होगा। इस मसले पर पार्टी में कोई मनमुटाव या गुटबाजी ना हो यह सुनिश्चित करना भी आसान नहीं होगा। BJP ने विपक्ष में रहते हुए जिन मुद्दों पर लोगों को एकजुट करने और समर्थन जुटाने का काम किया उनमें ज्यादा मुद्दे अब रहे नहीं। उसे ऐसे नए मुद्दे तलाशने होंगे जिन पर वह लोगों को अपनी ओर गोलबंद कर सके। खासकर ऐसे मुद्दे जो Gen Z को भी टच करें।
