नई दिल्ली । बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना से मिल रहे रुझानों ने पूरे राज्य के राजनीतिक माहौल को बदल दिया है। जो आंकड़े अब तक सामने आए हैं, वे साफ दिखा रहे हैं कि इस बार बिहार की जनता ने एकतरफा फैसला सुनाया है। एनडीए लगभग 200 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि महागठबंधन महज़ 38–40 सीटों पर ही आगे दिख रहा है। 243 सीटों वाले विधानसभा चुनाव में यह अंतर इतना बड़ा है कि चुनावी तस्वीर लगभग साफ मानी जा रही है।दो चरणों में हुए मतदान में रिकॉर्ड 67% से अधिक वोटिंग हुई थी, जिसने शुरुआत से ही स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि जनता इस बार सत्ता को लेकर निर्णायक मूड में है। महिलाओं की भागीदारी पिछले सभी चुनावों से अधिक रही और माना जा रहा है कि महिला वोटरों ने बड़े पैमाने पर एनडीए के पक्ष में मतदान किया। यह परिणामों में दिख भी रहा है, क्योंकि कई सीटें ऐसी हैं जहां एनडीए को अप्रत्याशित रूप से बड़ी बढ़त मिली है।एनडीए उम्मीदवारों का प्रदर्शन ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में बेहतर रहा। भाजपा और जदयू की संयुक्त रणनीति, बूथ प्रबंधन और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ एनडीए को मिला।
नीतीश कुमार के विकास मॉडल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता इस चुनाव में निर्णायक साबित हो रही है।महागठबंधन का प्रदर्शन कमजोर रहा है। तेजस्वी यादव ने पूरी ताकत से चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन उम्मीदवार चयन, संगठन की कमी और स्थानीय स्तर पर नेतृत्व को लेकर मतदाताओं का भरोसा डगमगा गया। कई सीटों पर महागठबंधन अपने पारंपरिक गढ़ भी नहीं बचा पाया है। कांग्रेस और वाम दल भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके।गणना के रुझानों के बाद एनडीए खेमे में उत्साह है और यह लगभग तय माना जा रहा है कि बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने जा रही है। मुख्यमंत्री पद को लेकर भी स्थिति स्पष्ट है और माना जा रहा है कि नीतीश कुमार ही सरकार का नेतृत्व करेंगे।बिहार की राजनीति में यह चुनाव एक बड़ा संदेश दे रहा है—मतदाता अब जातीय समीकरणों से आगे बढ़कर विकास और स्थिर शासन को प्राथमिकता दे रहे हैं। अब नजरें नई सरकार पर होंगी कि वह रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर कितनी तेजी से काम करती है।अगर आप सीट-वार पूरी सूची, पार्टी-वार वोट प्रतिशत या किसी जिले की अलग रिपोर्ट चाहें तो मैं तुरंत तैयार कर दूँ।
