बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के डॉक्टरों ने पाचन तंत्र से जुड़ी एक गंभीर बीमारी इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) के इलाज के लिए गाय के दूध में मौजूद लैक्टोफेरिन नामक प्रोटीन के उपयोग की नई दिशा में काम किया है। इस दिशा में किए जा रहे रिसर्च के शुरुआती नतीजे काफी उत्साहजनक हैं। बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग द्वारा किए जा रहे इस परीक्षण में यह देखा जा रहा है कि लैक्टोफेरिन कैसे शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाकर आइबीडी जैसे बीमारी पर नियंत्रण पा सकता है।

क्या है आइबीडी और क्यों है यह खतरनाक

आइबीडी एक ऐसा बीमारी जिसमें आंतों में लगातार सूजन बनी रहती है। इसके कारण पेट दर्द, दस्त, थकान और वजन कम होने जैसी समस्याएं होती हैं। यह बीमारी लंबे समय तक चल सकता है और जीवन को प्रभावित करता है। ऐसे में लैक्टोफेरिन, जो गाय के दूध में पाया जाता है, मरीजों के लिए एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आ रहा है।

बीएचयू के विशेषज्ञों ने बताया कि लैक्टोफेरिन एक प्रकार का प्रोटीन है जो शरीर की इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है और इन्फेक्शन  से लड़ने में मदद करता है। इसे मरीजों को कैप्सूल के रूप में दिया जा रहा है ताकि इसका प्रभाव सीधे उनके शरीर पर देखा जा सके।

मरीजों पर हो रहा परीक्षण

इस अध्ययन के तहत अब तक 1500 से अधिक मरीजों ने पंजीकरण कराया है। इनमें से 30 मरीजों को लैक्टोफेरिन परीक्षण के लिए चुना गया है। इन 30 मरीजों में से 12 मरीजों की स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि यह समझा जा सके कि लैक्टोफेरिन का सीधा प्रभाव उनकी बीमारी पर कितना हो रहा है। बाकी मरीजों को उनकी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए यह सप्लीमेंट के रूप में दिया जा रहा है।

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. देवेश प्रकाश यादव का कहना है कि अब तक जो भी परिणाम सामने आए हैं, वे काफी पॉजिटिव हैं। लैक्टोफेरिन न केवल आइबीडी के लक्षणों को कम कर रहा है, बल्कि मरीजों की स्वास्थय स्थिति में भी सुधार ला रहा है। उनका कहना है कि अगर भविष्य में यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा, तो यह आइबीडी के इलाज में एक नई क्रांति ला सकता है।

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