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बाराबंकी 09 मार्च । उत्तर प्रदेश में बाराबंकी जनपद की बंद पड़ी बुढ़वल चीनी मिल की सुरक्षा व तैनात कर्मचारियों पर हर साल पचास लाख रुपए खर्च हो रहा है। करीब अठारह साल से मिल बंद है जिसकी सुरक्षा में ही अब तक नौ करोड़ खर्च हो चुके हैं। यदि मिल बनकर चालू हो गई होती तो इलाके के गन्ना किसानों के साथ सरकार भी फायदे में होती जो सरकार का हर साल सुरक्षा में खर्च हो रहा वह न होता।

बताया जा रहा है कि बुढ़वल मिल को नए सिरे से बनवाने के लिए सरकार ने पचासी करोड़ दिए थे और बीस लाख रुपए जमीन सुरक्षित करने के लिए तार खिंचवाने के लिए दिए थे। तार खींच कर जमीन से अवैध कब्जा भी हट गया लेकिन इसी बीच यहां का पैसा छाता मिल चला गया।सूत्र बताते हैं कि छाता मिल को चलाने के लिए बुढ़वल मिल के पैसे को मिलाकर एक सौ पचास करोड़ भेजा गया लेकिन वहां गन्ना उत्पादन न होने से मिल चल नहीं सकी और पैसा सरकार को वापस चला गया। चूंकि बंद पड़ी मिल बुढ़वल केन मिल है और इस इलाके में गन्ना भी खूब है लिहाजा इसे बनवाकर चलवाने की मांग अब तेजी से शुरू हो गई है।

भाजपा नेता निवर्तमान विधायक शरद अवस्थी जहां समय समय पर इसकी मांग मुख्यमंत्री से करते रहते हैं। वहीं एम एल सी सहित क्षेत्र के विधायक ने भी दोनों सदनों में मांग उठाई है। सरकार इधर यदि ध्यान दे दे तो मिल बनकर चल जाए और गन्ना किसानों के जीवन में खुशहाली आए। केंद्र सरकार के बजट में भी बंद पड़े कल कारखानों को चलाने की बात कही गई थी। बजरंग दल व विहिप में काम कर चुके सुनील सिंह कहते है कि रामनगर क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए सरकार इसे बनवाकर चलवाए जिससे रोजी रोजगार से भी स्थानीय लोग जुड़ेंगे।अब अहम सवाल यह बना है कि इस मामले की कड़ी पैरवी कौन करता है।

प्रभारी जी एम जिला गन्ना अधिकारी दुष्यंत कुमार ने बताया कि रामनगर इलाके में गन्ना बोया जाता है। मिल गेट है। बुढ़वल मिल बनना या न बनना सरकार के हाथ हैं।

By editor

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